भारतीय नौसेना की समुद्री रक्षा क्षमताओं में आज एक ऐतिहासिक और महत्त्वपूर्ण इज़ाफ़ा हुआ, जब कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डिंग एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने तीन नए अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत नौसेना को सौंपे। रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और नौसेना के आला कमान की उपस्थिति में आयोजित एक भव्य समारोह में इन युद्धपोतों को औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल किया गया। यह उपलब्धि न केवल नौसेना की समुद्र में ताकत बढ़ाएगी, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भी एक मील का पत्थर साबित होगी।
अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ‘दुनागिरी’ की समुद्री धमक
भारतीय नौसेना को मिले तीन युद्धपोतों में सबसे प्रमुख और शक्तिशाली ‘दुनागिरी’ (Dunagiri) है, जो एक एडवांस्ड गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट (Advanced Guided Missile Frigate) है। यह फ्रिगेट नौसेना के सबसे परिष्कृत और घातक लड़ाकू प्लेटफार्मों में से एक है। 149 मीटर लंबा और 6,670 टन वजनी ‘दुनागिरी’ अत्याधुनिक हथियारों, सेंसरों, और उन्नत मिसाइल प्रणालियों से सुसज्जित है। इसमें एक एकीकृत युद्ध प्रबंधन प्रणाली (Integrated Combat Management System) भी शामिल है, जो इसे समुद्र में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सक्षम बनाती है। ‘दुनागिरी’ की गति, घातकता, और स्टील्थ क्षमताएँ इसे भारतीय नौसेना के बेड़े में एक अमूल्य संपत्ति बनाती हैं।
‘संशोधक’ और ‘अग्रय’ ने बढ़ाई सर्वेक्षण और पनडुब्बी रोधी क्षमताएँ
‘दुनागिरी’ के अलावा, भारतीय नौसेना को ‘संशोधक’ (Sanshodhak) और ‘अग्रय’ (Agray) जैसे दो अन्य महत्त्वपूर्ण युद्धपोत भी प्राप्त हुए। ‘संशोधक’ एक अत्याधुनिक सर्वेक्षण पोत (Survey Vessel) है, जो समुद्र की गहराई, जल विज्ञान, और अन्य महत्त्वपूर्ण डेटा एकत्र करने में सक्षम है। यह नौसेना को समुद्री चार्ट और मानचित्र तैयार करने, और सुरक्षित नौचालन सुनिश्चित करने में मदद करेगा। वहीं, ‘अग्रय’ एक पनडुब्बी रोधी युद्धक उथले जलयान (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft – ASW SWC) है, जो तटीय क्षेत्रों और उथले पानी में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। इन दोनों युद्धपोतों के शामिल होने से नौसेना की सर्वेक्षण और पनडुब्बी रोधी क्षमताएँ और अधिक मज़बूत होंगी।
स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि
गार्डन रीच शिपबिल्डिंग एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा इन तीन युद्धपोतों का निर्माण स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता है। यह रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ (Self-reliance in Defence) प्राप्त करने की दिशा में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। इन युद्धपोतों के निर्माण में बड़ी संख्या में स्वदेशी सामग्री, उपकरण, और प्रणालियों का उपयोग किया गया है, जिससे घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिला है और रोज़गार के अवसर पैदा हुए हैं। भारतीय नौसेना को मिले ये तीन नए युद्धपोत समुद्र में देश की रक्षा और सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करेंगे और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।





