Top 5 This Week

Related Posts

भारतीय अंतरिक्ष मिशन की नई उड़ान: चंद्रयान-4 लाएगा चांद से मिट्टी के नमूने; चंद्रयान-5 में होगा 350 किलो का विशाल रोवर

नई दिल्ली (12 मार्च, 2026): चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने के लिए अपने अगले बड़े मिशनों की तैयारी में जुट गया है। इसरो प्रमुख ने आगामी चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 मिशनों के साथ-साथ भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksha Station) को लेकर एक विस्तृत रोडमैप साझा किया है। भारत अब न केवल चांद पर उतरेगा, बल्कि वहां से सुरक्षित वापस लौटने और बड़े पैमाने पर अन्वेषण करने की क्षमता विकसित कर रहा है।

चंद्रयान-4: चांद से धरती की वापसी का मिशन

इसरो का अगला बड़ा लक्ष्य ‘सैंपल रिटर्न मिशन’ (Sample Return Mission) है, जिसे चंद्रयान-4 नाम दिया गया है:

  • मिट्टी के नमूने: यह मिशन चंद्रमा की सतह पर उतरेगा और वहां से चट्टानों और मिट्टी के नमूने एकत्र करेगा।
  • पृथ्वी पर वापसी: इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती चांद से उड़ान भरकर वापस धरती की कक्षा में प्रवेश करना और नमूनों को सुरक्षित लैंड कराना है।
  • जटिल तकनीक: इसमें ‘डॉकिंग’ और ‘अनडॉकिंग’ जैसी जटिल प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जाएगा, जो भविष्य के मानव मिशनों के लिए आधार तैयार करेगा।

चंद्रयान-5: 350 किलो के रोवर के साथ ‘चंद्र-भ्रमण’

चंद्रयान-5 मिशन भारत और जापान (JAXA) का एक संयुक्त प्रयास (LUPEX) होगा, जो चंद्रमा के अंधेरे वाले हिस्सों (दक्षिणी ध्रुव) की जांच करेगा:

  1. विशाल रोवर: जहां चंद्रयान-3 के ‘प्रज्ञान’ रोवर का वजन लगभग 26 किलो था, वहीं चंद्रयान-5 में 350 किलो का भारी-भरकम रोवर भेजा जाएगा।
  2. लंबी अवधि और दूरी: यह रोवर चंद्रमा की सतह पर कई किलोमीटर की दूरी तय करेगा और कई महीनों तक सक्रिय रहकर चांद पर पानी की मौजूदगी और खनिज संपदा का विश्लेषण करेगा।
  3. गहरी खुदाई: रोवर में उन्नत ड्रिलिंग मशीनें लगी होंगी जो चंद्रमा की सतह के भीतर गहरे जाकर बर्फ के नमूने ले सकेंगी।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS): 2035 तक का लक्ष्य

भारत अब अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है:

  • पहला मॉड्यूल (2028): इसरो प्रमुख के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला छोटा मॉड्यूल साल 2028 तक लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।
  • पूर्ण संचालन (2035): साल 2035 तक भारत का अपना पूर्ण विकसित अंतरिक्ष स्टेशन अंतरिक्ष में काम करना शुरू कर देगा, जहां भारतीय अंतरिक्ष यात्री रहकर शोध कर सकेंगे।
  • गगनयान की भूमिका: वर्तमान ‘गगनयान’ मिशन इस अंतरिक्ष स्टेशन की दिशा में पहला कदम है, जो मानव को अंतरिक्ष में ले जाने की क्षमता सिद्ध करेगा।

भविष्य की योजना: 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय

इसरो ने अपनी दीर्घकालिक योजना में स्पष्ट किया है कि अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना के बाद, भारत का अगला बड़ा लक्ष्य साल 2040 तक एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा की सतह पर उतारना है। इसके लिए नई पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल (NGLV) पर काम शुरू हो चुका है, जो भारी पेलोड ले जाने में सक्षम होंगे।

Popular Articles