नई दिल्ली/आनंद: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद भारतीय डेयरी किसानों के बीच पनप रही चिंताओं पर देश की सबसे बड़ी डेयरी सहकारी संस्था ‘अमूल’ (GCMMF) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। अमूल के प्रबंध निदेशक (MD) जयेन मेहता ने स्पष्ट किया है कि भारत-US ट्रेड डील से देश के करोड़ों डेयरी किसानों के हितों को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि यह भविष्य के लिए एक बेहतर रास्ता तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों की संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा है और भारतीय डेयरी बाजार की सुरक्षा के लिए कड़े सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए हैं।
किसानों की मुख्य चिंता क्या थी?
समझौते की खबरों के बीच किसानों और किसान संगठनों को यह डर सता रहा था कि:
- सस्ते आयात का डर: अमेरिका से रियायती दरों पर दूध, पनीर और घी जैसे डेयरी उत्पादों के आयात से भारतीय बाजारों में घरेलू उत्पादों की मांग कम हो जाएगी।
- प्रतिस्पर्धा: भारतीय छोटे किसान, जिनके पास 2 से 5 पशु हैं, अमेरिकी डेयरी फार्मों की विशाल मशीनरी और बड़े पैमाने पर उत्पादन का मुकाबला नहीं कर पाएंगे।
- कीमतों में गिरावट: यदि अमेरिकी डेयरी उत्पाद भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर आते हैं, तो किसानों को मिलने वाले दूध के दामों (Milk Procurement Prices) में भारी गिरावट आ सकती है।
अमूल के MD ने क्यों कहा ‘रास्ता बेहतर है’?
जयेन मेहता ने व्यापार समझौते के सकारात्मक पहलुओं को उजागर करते हुए कई महत्वपूर्ण तर्क दिए:
- मजबूत टैरिफ संरक्षण: उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार ने डेयरी क्षेत्र को ‘संवेदनशील सूची’ में रखा है। इसका अर्थ है कि अमेरिकी डेयरी उत्पादों पर अभी भी इतना आयात शुल्क (Import Duty) लागू रहेगा कि वे भारतीय उत्पादों से सस्ते न हो सकें।
- गुणवत्ता और शुद्धता: भारतीय डेयरी उत्पादों की अपनी अलग पहचान है। अमूल के MD के अनुसार, भारतीय उपभोक्ता अपने स्थानीय स्वाद और शुद्धता पर भरोसा करते हैं, जो विदेशी ब्रांडों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
- निर्यात के नए अवसर: उन्होंने कहा कि यह डील ‘वन-वे’ नहीं है। भविष्य में भारत के उच्च-गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद (जैसे जैविक घी और विशिष्ट चीज) अमेरिकी बाजारों में अपनी जगह बना सकेंगे, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।
- तकनीकी सहयोग: समझौते के माध्यम से पशु नस्ल सुधार और दूध उत्पादन की तकनीक में अमेरिकी सहयोग मिल सकता है, जिससे प्रति पशु दूध उत्पादन में वृद्धि होगी।
सरकार का रुख: ‘डेयरी सेक्टर के साथ कोई समझौता नहीं’
वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत ने बातचीत के दौरान यह स्पष्ट कर दिया था कि 8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों की आजीविका डेयरी पर निर्भर है। इसलिए, ऐसी किसी भी रियायत से बचा गया है जो सीधे तौर पर किसानों के आर्थिक ढांचे को चोट पहुँचाए।





