भराड़ीसैंण (गैरसैंण) | 14 मार्च, 2026: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान आज सदन का माहौल शब्दों के बाणों से गरमाया रहा। धामी सरकार ने उत्तराखंड के विकास के लिए अपने अगले चार साल का व्यापक रोडमैप सदन के पटल पर रखा। सरकार के इन दावों और भविष्य की योजनाओं पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताते हुए जमकर हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही में काफी गतिरोध देखने को मिला।
सरकार का रोडमैप: ‘आत्मनिर्भर और सशक्त उत्तराखंड’ का विजन
सदन पटल पर अपना विजन रखते हुए सरकार ने आगामी चार वर्षों के लिए कई महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को गिनाया:
- बुनियादी ढांचे का विकास: सीमांत क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाने, रोपवे कनेक्टिविटी और स्मार्ट विलेज क्लस्टर बनाने पर जोर दिया गया है।
- आर्थिक विकास: राज्य की जीडीपी (GDP) को दोगुना करने और पर्यटन क्षेत्र के जरिए स्थानीय रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
- पलायन पर प्रहार: पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ कर पलायन रोकने के लिए विशेष योजनाओं का रोडमैप पेश किया गया।
विपक्ष का आक्रोश: रणनीतिक बदलाव और तीखे सवाल
विपक्ष ने इस रोडमैप को ‘हवाई दावों का पुलिंदा’ करार देते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की:
- वॉकआउट के बजाय सदन में मोर्चा: आमतौर पर देखा जाता रहा है कि विपक्ष बजट या महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान सदन से वॉकआउट कर देता है, जिससे सरकार बजट को ध्वनिमत से आसानी से पारित करा लेती है। लेकिन इस बार विपक्ष ने रणनीति बदलते हुए सदन के भीतर ही मौजूद रहकर मोर्चा संभाला।
- जमीनी हकीकत पर सवाल: नेता प्रतिपक्ष और अन्य विपक्षी विधायकों ने सरकार से पूछा कि पिछले वर्षों के वादों का क्या हुआ? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल कागजों पर आंकड़े पेश कर रही है, जबकि धरातल पर बेरोजगारी और महंगाई की स्थिति जस की तस है।
- हंगामेदार चर्चा: विपक्ष के विधायक वेल में आकर नारेबाजी करते नजर आए, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को कई बार बाधित होना पड़ा।
बजट और ध्वनिमत की स्थिति
परंपरागत रूप से विपक्ष की अनुपस्थिति में बजट पारित होने की प्रक्रिया इस बार चुनौतीपूर्ण रही। चूंकि विपक्ष सदन में डटा रहा, इसलिए सरकार को हर सवाल का जवाब देने और तीखी बहसों का सामना करना पड़ा। सत्ता पक्ष ने जहां इसे राज्य के उज्ज्वल भविष्य का खाका बताया, वहीं विपक्ष ने इसे जनता को गुमराह करने वाला दस्तावेज कहा।





