मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है और वे अब दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होने के लिए राज्यसभा का रुख कर रहे हैं। इस अचानक हुए फैसले ने न केवल विपक्ष को हैरान कर दिया है, बल्कि उनकी अपनी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर भी असंतोष की ज्वाला भड़का दी है।
ललन सिंह पर क्यों भड़के कार्यकर्ता और JDU नेता?
राजधानी पटना में JDU कार्यालय और मुख्यमंत्री आवास के बाहर भारी संख्या में जुटे कार्यकर्ता और नेता नेतृत्व के प्रति नाराजगी जता रहे हैं।
- साजिश का आरोप: कई JDU कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजना एक गहरी ‘साजिश’ का हिस्सा है ताकि राज्य की सत्ता पर किसी और का वर्चस्व स्थापित हो सके।
- ललन सिंह के प्रति नाराजगी: पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के प्रति कार्यकर्ताओं का गुस्सा इसलिए है क्योंकि उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्ट रुख अपनाने के बजाय यह कह दिया कि “पार्टी नीतीश कुमार की है और फैसला भी उन्हीं का होगा।” कार्यकर्ताओं का मानना है कि ललन सिंह जैसे शीर्ष नेताओं ने नीतीश कुमार के “कद को कम करने” वाली इस योजना का विरोध नहीं किया।
- भय और अनिश्चितता: पार्टी के निचले स्तर के नेताओं को डर है कि नीतीश कुमार के केंद्र में जाने से राज्य में JDU का अस्तित्व कमजोर हो सकता है।
नीतीश कुमार को किसने दिया ‘धोखा’?
सियासी गलियारों में ‘धोखे’ को लेकर दो मुख्य थ्योरी चर्चा में हैं:
- विपक्ष का आरोप (भाजपा की रणनीति): पूर्व उपमुख्यमंत्री और RJD नेता तेजस्वी यादव ने इसे “जनादेश की चोरी” करार देते हुए कहा है कि भाजपा ने बिहार में ‘महाराष्ट्र जैसा प्रयोग’ किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने नीतीश कुमार को ‘हाइजैक’ कर लिया है और वे उन्हें बिहार की सत्ता से बेदखल कर अपना मुख्यमंत्री बैठाना चाहते हैं।
- कार्यकर्ताओं का ‘भीतरी धोखा’ का दावा: JDU के कई वफादार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पार्टी के भीतर मौजूद कुछ ‘जयचंदों’ ने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नीतीश कुमार पर राज्यसभा जाने का दबाव बनाया। प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि होली के शुभ अवसर पर उन्हें यह “तोहफा” मिला कि उनके नेता को बिहार से बाहर भेजा जा रहा है।
नीतीश कुमार का पक्ष: राज्यसभा जाने की ‘पुरानी इच्छा’
अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा थी कि वे विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य बनें। उन्होंने विश्वास दिलाया कि:
- वे राज्यसभा के माध्यम से देश की सेवा जारी रखेंगे।
- नई बनने वाली सरकार को उनका पूर्ण मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त होगा।
- बिहार के विकास के प्रति उनका संकल्प अडिग रहेगा।





