बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिले भारी बहुमत के बाद राष्ट्रीय राजनीति का माहौल तेजी से बदलता दिख रहा है। चुनाव परिणामों के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल पर सीधा राजनीतिक संदेश देते हुए कहा कि अब भाजपा का अगला लक्ष्य बंगाल है। उनके इस बयान के बाद बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने तीखा पलटवार किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विजय संबोधन में कहा, “गंगा बिहार से बंगाल तक बहती है। बिहार ने बंगाल में भाजपा की जीत का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। अब हम बंगाल से भी जंगल राज हटाएंगे।” उन्होंने इशारों-इशारों में साफ कर दिया कि बिहार की जीत के बाद पार्टी पश्चिम बंगाल में बदलाव के लिए पूरी ताकत झोंकने को तैयार है।
पीएम मोदी के इस बयान ने बंगाल की राजनीति में हलचल पैदा कर दी। टीएमसी ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर कटाक्ष किया। राज्य सरकार में मंत्री शशि पांजा ने कहा कि प्रधानमंत्री “किसी भ्रम में न रहें।” उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता भाजपा को कभी स्वीकार नहीं करेगी और यहां जीत का सपना देखना “दूर की कौड़ी” है।
टीएमसी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा बाहरी हस्तक्षेप से बंगाल की राजनीति को अस्थिर करना चाहती है, किंतु राज्य की जनता बार-बार लोकतांत्रिक तरीके से टीएमसी पर भरोसा जताती आई है। टीएमसी नेताओं का दावा है कि 2024 और उसके बाद हुए विभिन्न चुनावों ने साबित किया कि भाजपा के लिए बंगाल अभी भी बेहद कठिन ज़मीन बनी हुई है।
भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि बिहार में मिले प्रचंड जनादेश ने देशभर में पार्टी के लिए सकारात्मक माहौल बनाया है और इस लहर का असर पश्चिम बंगाल में भी महसूस होगा। वहीं टीएमसी का कहना है कि बंगाल की राजनीतिक और सामाजिक संरचना बिहार या अन्य राज्यों से बिल्कुल अलग है, और यहां की जनता विकास, संस्कृति और अपनी पहचान को प्राथमिकता देती है।
प्रधानमंत्री के बयान और टीएमसी के पलटवार से साफ है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति और भी गरमाने वाली है। बिहार के परिणामों ने जहां भाजपा को नई ऊर्जा दी है, वहीं टीएमसी पहले से ही मोर्चा संभालने की तैयारी में जुट गई है।





