Tuesday, March 3, 2026

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बिहार चुनाव 2025: सीमांचल में AIMIM की मजबूती बरकरार, ओवैसी की पार्टी ने लगाया महागठबंधन को तगड़ा झटका

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर साफ कर दिया कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) सीमांचल में अब एक स्थायी राजनीतिक शक्ति बन चुकी है। मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी की पकड़ न केवल कायम रही, बल्कि उसने इस चुनाव में राजद और कांग्रेस जैसे महागठबंधन घटक दलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।

25 सीटों पर चुनाव, 5 पर जीत—2020 का प्रदर्शन दोहराया
AIMIM ने इस बार बिहार में 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जिनमें से 24 सीटें सीमांचल की मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र थीं। अंतिम नतीजों में पार्टी ने 5 सीटें जीतकर अपना पिछला (2020) रिकॉर्ड दोहरा दिया।
2020 में AIMIM ने जोकीहाट, बहादुरगंज, ठाकुरगंज, किशनगंज और कोचाधामन सीट जीती थीं, हालांकि बाद में चार विधायक RJD में शामिल हो गए थे। इस बार के परिणामों ने यह साबित कर दिया कि ओवैसी की पार्टी की पकड़ सीमांचल में पहले से कहीं अधिक मजबूत है।

AIMIM को मिला 1.88% वोट शेयर
राज्यभर में AIMIM को 1.88% वोट मिले, जो यह दर्शाता है कि सीमांचल में मुस्लिम वोटरों के बीच पार्टी का प्रभाव स्थिर है और बड़े दलों के लिए चुनौती भी।

AIMIM की पांच विजयी सीटें
2025 में AIMIM ने निम्नलिखित सीटों पर जीत दर्ज की—

  • जोकिहाट (अररिया) – मोहम्मद मुर्शिद आलम
  • बहादुरगंज (किशनगंज) – मोहम्मद तौसीफ आलम
  • कोचाधामन (किशनगंज) – मोहम्मद सरवर आलम
  • अमौर (पूर्णिया) – अख्तरुल इमान
  • बायसी (पूर्णिया) – गुलाम सरवर

इन जीतों ने साफ कर दिया कि AIMIM सीमांचल की मुस्लिम बहुल सीटों पर अब निर्णायक भूमिका निभा रही है।

सीमांचल में अभियान और रणनीति रंग लाई
सीमांचल की 24 सीटों में मुस्लिम आबादी 40% से 70% के बीच है। चुनाव से पहले ओवैसी ने यहां कई आक्रामक रैलियां कीं और सीधे तौर पर मुस्लिम मुद्दों को उठाया। उनकी रणनीति ने वोटों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राजद-कांग्रेस को AIMIM से भारी नुकसान
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, AIMIM का मजबूत प्रदर्शन कई सीटों पर मुस्लिम वोटों के बंटवारे की वजह बना, जिससे RJD और कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा।
नतीजों में साफ दिखा कि कांग्रेस AIMIM से भी कम सीटें जीत पाई, जबकि RJD उन क्षेत्रों में पिछड़ गई जहाँ AIMIM प्रभावी ढंग से मैदान में रही।

स्थायी ताकत बन गई AIMIM
सीमांचल में AIMIM का उभार पिछले दो चुनावों से दिखाई दे रहा है। पार्टी के संगठन ने पिछले पांच वर्षों में गांव-गांव में मजबूत ढांचा तैयार किया है।
अक्सर उन पर “वोट काटने” के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन 2025 के नतीजों ने बता दिया कि AIMIM का वोट बैंक अब स्थायी और संगठित है।

आगे की राजनीति पर बड़ा असर
सीमांचल में AIMIM की स्थिर मौजूदगी से महागठबंधन और एनडीए—दोनों की चुनावी रणनीतियों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
2025 का चुनाव यह संकेत दे गया है कि ओवैसी की पार्टी अब बिहार में सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि एक प्रभावी राजनीतिक शक्ति है, जिसकी भूमिका आने वाले चुनावों में निर्णायक होगी।

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