पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस नेताओं के हालिया बयानों ने यह संकेत दिया है कि पार्टी मुख्यमंत्री पद का चेहरा खुद तय करना चाहती है, जिससे राजद (RJD) और खासकर तेजस्वी यादव की स्थिति असहज हो गई है।
कांग्रेस की बदलती भूमिका
2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का चेहरा तेजस्वी यादव थे और कांग्रेस ने सीटें राजद के हिसाब से ली थीं। लेकिन इस बार हालात बदलते दिख रहे हैं। कांग्रेस अब सिर्फ सीटें लेने की स्थिति में नहीं, बल्कि सीटों का बंटवारा और नेतृत्व तय करने की भूमिका निभाना चाहती है।
कार्यसमिति बैठक से पहले उठी सीएम फेस की बात
आजादी के बाद पहली बार बिहार में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक आयोजित हो रही है। इस ऐतिहासिक बैठक से पहले ही पार्टी नेताओं के बयानों ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया।
- कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने हाल ही में कहा था कि “सीएम का चेहरा जनता तय करेगी।”
- अब कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने पटना पहुंचकर बयान दिया कि I.N.D.I.A. गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा कांग्रेस अध्यक्ष तय करेंगे।
यह बयान राजद के लिए अप्रत्याशित है, क्योंकि महागठबंधन के पिछले चुनावों में तेजस्वी ही चेहरा रहे थे।
राहुल गांधी की चुप्पी और संकेत
तेजस्वी यादव ने लोकसभा चुनाव के बाद साफ कहा था कि राहुल गांधी ही विपक्ष का पीएम चेहरा होंगे। लेकिन राहुल गांधी ने बिहार में विपक्ष के सीएम चेहरे पर चुप्पी साधे रखी है। उनकी वोटर अधिकार यात्रा में शुरू में तेजस्वी उनके साथ दिखे, पर बाद में यात्रा का समापन कांग्रेस और I.N.D.I.A. के दबदबे में रहा।
सीट बंटवारे पर भी कड़ा मोलभाव
सूत्रों के अनुसार—
- कांग्रेस 70 सीटें मांग रही है।
- राजद 50 से अधिक सीटें देने के मूड में नहीं है।
- फिलहाल माना जा रहा है कि 57–58 सीटों पर समझौता हो सकता है।
आज होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे लालू प्रसाद यादव से मुलाकात कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इसी मुलाकात में सीट बंटवारे का फार्मूला तय हो सकता है।
राजद खेमे में खलबली
राजद और महागठबंधन के पुराने सहयोगी अब तक तेजस्वी यादव को ही चेहरा मानते रहे हैं। यहां तक कि बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी तेजस्वी के पक्ष में बयान दिया था। लेकिन अब कांग्रेस की रणनीति ने तेजस्वी की दावेदारी पर संशय खड़ा कर दिया है।





