बागेश्वर/अल्मोड़ा: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बिनसर वन्यजीव अभयारण्य (Binsar Wildlife Sanctuary) से सटे इलाकों में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा घटना में, बागेश्वर जिले की सीमा से लगे अभयारण्य के जंगलों में घास काटने गई एक महिला पर गुलदार ने घात लगाकर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में महिला की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे बागेश्वर और बिनसर के सीमावर्ती गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है।
हादसे का विवरण: जंगल गई थी घास काटने
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह यह हृदय विदारक घटना तब हुई जब गांव की अन्य महिलाओं के साथ पीड़ित महिला जंगल गई थी:
- अचानक हमला: महिला घने जंगल के भीतर अन्य साथियों से कुछ ही दूरी पर घास काट रही थी, तभी झाड़ियों में छिपे गुलदार ने उसकी गर्दन पर झपट्टा मार दिया।
- मशक्कत के बाद शव बरामद: साथ गई महिलाओं के शोर मचाने और ग्रामीणों के जुटने के बाद गुलदार जंगल की गहराई में भाग गया। ग्रामीण जब तक महिला के पास पहुँचे, वह दम तोड़ चुकी थी।
- ग्रामीणों में रोष: घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुँची, जहाँ ग्रामीणों ने सुरक्षा की मांग को लेकर विभाग के खिलाफ नारेबाजी की।
बागेश्वर में दहशत: घरों में कैद हुए ग्रामीण
यह हमला बिनसर अभयारण्य के उस हिस्से में हुआ है जो बागेश्वर जिले की सीमाओं को छूता है। इस घटना के बाद आसपास के दर्जनों गांवों में खौफ का माहौल है:
- स्कूल जाने वाले बच्चों पर खतरा: अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार अब बस्तियों के इतने करीब आ गया है कि दिन के उजाले में भी बाहर निकलना सुरक्षित नहीं है।
- खेती-बाड़ी ठप: जाड़ों के मौसम में मवेशियों के लिए चारा जुटाना ग्रामीणों की मजबूरी है, लेकिन गुलदार के लगातार हमलों ने खेतों और जंगलों में जाना मुश्किल कर दिया है।
- नाइट कर्फ्यू जैसी स्थिति: शाम होते ही गांव की गलियों में सन्नाटा पसर जाता है। लोग लाठी-डंडों और मशालों के साथ समूहों में पहरा देने को मजबूर हैं।
वन विभाग की कार्रवाई: पिंजरा लगाने की मांग
घटना स्थल का मुआयना करने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी है और निम्नलिखित कदम उठाने का आश्वासन दिया है:
- गश्त में इजाफा: प्रभावित क्षेत्र में वनकर्मियों की गश्त बढ़ा दी गई है और लोगों को अकेले जंगल न जाने की सलाह दी गई है।
- पिंजरा लगाने की प्रक्रिया: ग्रामीणों ने आदमखोर घोषित करने और गुलदार को पकड़ने के लिए तत्काल पिंजरा लगाने की मांग की है। विभाग ने उच्चाधिकारियों को इस संबंध में प्रस्ताव भेजने की बात कही है।
- आर्थिक सहायता: सरकार की नीति के अनुसार, मृतक महिला के परिजनों को जल्द से जल्द मुआवजा राशि प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विशेषज्ञों की राय: क्यों बढ़ रहे हैं हमले?
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों के मौसम में गुलदार अक्सर शिकार की तलाश में निचले इलाकों और इंसानी बस्तियों के करीब आ जाते हैं। बिनसर जैसे घने वन क्षेत्रों में प्राकृतिक शिकार की कमी भी गुलदार को हिंसक बना रही है।





