Saturday, February 14, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

बारिश का कहर: जंगलों में भी मातम, बाघ-तेंदुए और हाथियों तक पर टूटा आफत का कहर

देहरादून। इस बार की भीषण बारिश और बादल फटने जैसी आपदाओं ने न केवल इंसानी बस्तियों को तबाह किया, बल्कि जंगलों और वहां रहने वाले बेजुबान प्राणियों को भी गहरी चोट पहुंचाई है। तेज बरसात और उफनती नदियों-नालों ने बाघ, तेंदुए और हाथियों जैसे कई वन्य जीवों की जान ले ली। प्राकृतिक आपदा से कुमाऊं भर के जंगलों में मातम पसरा है।
इंसानों के साथ-साथ वन्यजीव भी प्रभावित
अक्सर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और अन्य क्षेत्रों में बाघ-तेंदुओं की मौत आपसी संघर्ष के चलते होती रही है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। बरसात से आई आपदा ने सीधे वन्यजीवों को निशाना बनाया है। भारी बारिश में नाले-नदियों में बहकर जान गंवाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट जांच से तय होना बाकी है कि इन वन्यजीवों की मौतें सीधी तौर पर आपदा के कारण हुईं या अन्य वजहों से।

आपदा से मौत या हादसा – कई केस सामने आए

केस 1 (4 सितंबर, बाजपुर): लेवड़ा नदी पुल के नीचे एक तेंदुआ घायल अवस्था में मिला। उसके शरीर पर गंभीर चोट के निशान थे। माना गया कि वह बाढ़ में बहकर घायल हुआ।
केस 2 (6 सितंबर, कोटद्वार): मालन नदी में हाथी का बच्चा झुंड से बिछड़कर बह गया। वन विभाग की टीम ने बड़ी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।
केस 3 (8 सितंबर, रामनगर – कालाढूंगी): चकलुआ बीट क्षेत्र में सात वर्षीय बाघ का शव बरसाती नाले से बरामद हुआ। आशंका जताई गई कि बाघ घायल अवस्था में था और नाले के तेज बहाव का सामना नहीं कर पाया।
केस 4 (9 सितंबर, टनकपुर – चंपावत): एक बरसाती नाले से तेंदुए का शव बरामद किया गया। प्रारंभिक आशंका है कि वह बहाव में बहकर मारा गया। रिपोर्ट अभी लंबित है।
तस्वीरें भी आईं सामने

कोसी नदी से भी खौफनाक तस्वीरें सामने आईं। 3 सितंबर को नदी के एक टीले पर पांच हिरण फंसे देखे गए, जबकि 4 सितंबर को मोहान क्षेत्र में दो हाथी बहते-बहते बच गए। इस दौरान राहतकर्मियों और ग्रामीणों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकलने में मदद की।
विशेषज्ञों की राय

वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार का कहना है कि “दैवीय आपदा से सबसे अधिक परेशानी सरीसृपों और कमजोर वन्यजीवों को होती है। उम्रदराज और घायल बाघ-तेंदुए नदियों के तेज बहाव का सामना नहीं कर पाते। अफसोस कि इस ओर प्रशासन और समाज का ध्यान अब तक नहीं गया है।”

वहीं, पीसीसीएफ (हॉफ वाइल्ड लाइफ) रंजन कुमार मिश्रा का कहना है कि “मानसून के दौरान वन्यजीवों के वासस्थल प्रभावित होते हैं और हताहत होने की आशंका रहती है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक रिकार्ड उपलब्ध नहीं है, जिससे यह माना जा सके कि मौजूदा मौतें सीधे दैवीय आपदा से हुई हैं।”
जंगलों में पसरा सन्नाटा
मानसून की आपदाओं ने इस बार यह साफ कर दिया है कि इंसानी बस्तियों की तरह जंगल भी प्राकृतिक आपदाओं से अछूते नहीं हैं। नदियों के उफान और नालों की बाढ़ ने न केवल खेत-खलिहान बहाए हैं बल्कि वन्यजीवों के अस्तित्व को भी खतरे में डाल दिया है।

Popular Articles