ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनावों के बाद सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपनी 50 सदस्यीय कैबिनेट के विभागों का बंटवारा कर दिया है। इस नई सरकार में सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण नाम डॉ. खलीलुर रहमान का है, जिन्हें देश का नया विदेश मंत्री नियुक्त किया गया है। खलीलुर रहमान इससे पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और रोहिंग्या मुद्दे पर मुख्य सलाहकार के उच्च प्रतिनिधि के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी नियुक्ति को बांग्लादेश की विदेश नीति में एक ‘संतुलित और पेशेवर’ दृष्टिकोण की वापसी के रूप में देखा जा रहा है।
कौन हैं डॉ. खलीलुर रहमान? (शिक्षा और करियर)
डॉ. खलीलुर रहमान एक अनुभवी राजनयिक और अर्थशास्त्री हैं, जिनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का विशाल अनुभव है:
- शिक्षा: उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से सार्वजनिक स्वास्थ्य में पीएचडी की है। इसके अलावा उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र, टफ्ट्स यूनिवर्सिटी से कानून और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की है।
- राजनयिक करियर: 1979 बैच के विदेश सेवा अधिकारी (BCS) रहे रहमान कनाडा में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रह चुके हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) में विभिन्न वरिष्ठ पदों पर 25 वर्षों तक कार्य किया है।
- तकनीकी कोटा (Technocrat): उन्हें सरकार में ‘टेक्नोक्रेट कोटे’ से मंत्री बनाया गया है, जो उनकी विशेषज्ञता को दर्शाता है।
चर्चा में क्यों है यह नियुक्ति?
खलीलुर रहमान की नियुक्ति कई मायनों में दिलचस्प और विवादास्पद रही है:
- BNP के साथ पुराने मतभेद: मई 2025 में, जब वे अंतरिम सरकार में NSA थे, तब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने उनके कुछ बयानों को लेकर उनके इस्तीफे की मांग की थी। हालांकि, अब उसी पार्टी की सरकार में उन्हें विदेश मंत्रालय जैसा अहम विभाग सौंपा गया है।
- भारत के साथ संबंध: जेएनयू के पूर्व छात्र होने के कारण भारत के प्रशासनिक और बौद्धिक तंत्र की उन्हें गहरी समझ है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उन्हें बधाई देते हुए भविष्य में साथ मिलकर काम करने की उम्मीद जताई है।
- रोहिंग्या मुद्दा: वे रोहिंग्या संकट पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश का पक्ष रखने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति माने जाते हैं।
अगला कदम: ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ की नीति
कार्यभार संभालने के बाद खलीलुर रहमान ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया है:
- पड़ोसियों के साथ संबंध: उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की विदेश नीति ‘सॉवरेन इक्वालिटी’ (संप्रभु समानता) और आपसी सम्मान पर आधारित होगी। वे भारत सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: उन्होंने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ का नारा देते हुए कहा कि कूटनीति किसी दलीय विचारधारा से नहीं, बल्कि देश के लोगों की आकांक्षाओं से प्रेरित होगी।
- अराकान कॉरिडोर: उनके कार्यकाल में म्यांमार के साथ ‘अराकान कॉरिडोर’ जैसे मानवीय गलियारों पर चर्चा तेज होने की संभावना है।




