इस्लामाबाद: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बलूचिस्तान प्रांत में जारी उग्रवाद और पाकिस्तानी सेना की असफलताओं को लेकर एक चौंकाने वाला बयान दिया है। एक निजी टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में आसिफ ने स्वीकार किया कि पाकिस्तानी सेना को बलूच बागियों (BLA) का सामना करने में भारी ‘शारीरिक और भौगोलिक’ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान का इलाका इतना दुर्गम और पहाड़ी है कि वहां तैनात सैनिकों को विद्रोहियों की छापामार रणनीति के सामने टिकने में शारीरिक रूप से बेहद कठिनाई होती है। रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों पर हमलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।
“पहाड़ों और गुफाओं में छिपे हैं बागी”: ख्वाजा आसिफ
रक्षा मंत्री ने बलूच विद्रोहियों के खिलाफ अभियान में सेना की चुनौतियों को विस्तार से समझाया:
- कठिन भौगोलिक परिस्थितियां: आसिफ के अनुसार, बलूचिस्तान का विशाल और वीरान पहाड़ी इलाका विद्रोहियों के लिए एक ‘सुरक्षित ढाल’ की तरह काम करता है। सैनिक इन दुर्गम ऊंचाइयों पर उतनी फुर्ती से काम नहीं कर पाते जितनी आसानी से वहां के स्थानीय बागी कर लेते हैं।
- शारीरिक अक्षमता का तर्क: उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सैनिकों को उन ऊंचाइयों और गुफाओं में लड़ने के लिए प्रशिक्षण तो दिया जाता है, लेकिन वास्तविक युद्ध की स्थिति में वे वहां की जलवायु और चढ़ाई के कारण जल्द ही शारीरिक रूप से थक जाते हैं।
- इंटेलिजेंस की विफलता: आसिफ ने यह भी संकेत दिया कि स्थानीय समर्थन और जटिल रास्तों की वजह से सेना को समय पर सटीक जानकारी नहीं मिल पाती है।
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) का बढ़ता दबाव
हाल के महीनों में बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सेना और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की परियोजनाओं को निशाना बनाया है:
- छापामार हमला (Guerrilla Warfare): बागी ‘हिट एंड रन’ की नीति अपनाते हैं, जिसमें वे हमला करने के तुरंत बाद पहाड़ों में गायब हो जाते हैं। सेना के लिए उनका पीछा करना असंभव हो जाता है।
- आत्मघाती दस्ते: मजीद ब्रिगेड जैसे आत्मघाती समूहों के हमलों ने पाकिस्तानी सेना के मनोबल को काफी हद तक प्रभावित किया है।
- संसाधनों की कमी: रक्षा मंत्री के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि आधुनिक हथियारों के बावजूद पाकिस्तानी सेना बलूच राष्ट्रवादियों के ‘जमीनी प्रतिरोध’ का मुकाबला करने में विफल रही है।
विपक्ष और विशेषज्ञों ने घेरा
रक्षा मंत्री के इस बयान के बाद पाकिस्तान में नई बहस छिड़ गई है:
- सेना की साख पर सवाल: आलोचकों का कहना है कि दुनिया की शक्तिशाली सेनाओं में शुमार होने का दावा करने वाली पाक सेना अगर अपने ही देश के एक प्रांत में “शारीरिक दिक्कतों” का बहाना बना रही है, तो यह उसकी बड़ी नाकामी है।
- मानवाधिकारों का मुद्दा: दूसरी ओर, बलूच कार्यकर्ताओं का कहना है कि सेना अपनी हार को छुपाने के लिए भूगोल का बहाना बना रही है, जबकि असली वजह बलूच लोगों का अपनी जमीन और संसाधनों के लिए किया जा रहा संघर्ष है।
प्रशासनिक कदम और भविष्य की चुनौती
ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिया कि सरकार अब सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ ‘राजनीतिक संवाद’ पर भी विचार कर सकती है, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
“यह लड़ाई केवल हथियारों की नहीं है, बल्कि उस इलाके की कठिन परिस्थितियों की भी है। हमारे जवान बहादुरी से लड़ रहे हैं, लेकिन हमें यह मानना होगा कि वहां के भूगोल ने विद्रोहियों को एक रणनीतिक लाभ दे रखा है।” — ख्वाजा आसिफ, रक्षा मंत्री (पाकिस्तान)





