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बनभूलपुरा मामला: सुप्रीम कोर्ट में 28 अप्रैल को पेश होगी पुनर्वास की रिपोर्ट; सात हजार लोगों ने किया पीएम आवास के लिए आवेदन

हल्द्वानी/नैनीताल: बनभूलपुरा में रेलवे भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में आगामी 28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण होने जा रही है। जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस सुनवाई के दौरान प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर की गई तैयारियों का ब्यौरा पेश करेगी। न्यायालय के पिछले निर्देशों के अनुपालन में, प्रशासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत प्राप्त आवेदनों की पात्र और अपात्र सूची तैयार कर ली है, जिसे अब अंतिम निर्णय के लिए शीर्ष अदालत के समक्ष रखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई थी प्रक्रिया

गौरतलब है कि 24 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रभावित लोगों के पुनर्वास पर जोर दिया था। अदालत ने निर्देश दिए थे कि जो लोग इस भूमि से हटाए जा रहे हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देकर बसाने की संभावना तलाशी जाए। इसी आदेश के बाद प्रशासन ने युद्धस्तर पर कार्य शुरू किया।

सात हजार आवेदनों का हुआ भौतिक सत्यापन

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जमीन पर काम किया।

  • फॉर्म वितरण और कैंप: 17 मार्च से प्रभावित क्षेत्रों के सभी वार्डों में फॉर्म बांटने का काम शुरू हुआ था। इसके बाद 20 मार्च से 4 अप्रैल तक क्षेत्र के छह अलग-अलग स्थानों पर विशेष कैंप लगाए गए, ताकि लोग आसानी से आवेदन जमा कर सकें।
  • भारी उत्साह: इन कैंपों के माध्यम से लगभग 7,000 परिवारों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर पाने के लिए अपनी दावेदारी पेश की है।

पात्र-अपात्रों की छंटनी अंतिम चरण में

आवेदन जमा होने के बाद प्रशासन ने उनके भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की प्रक्रिया शुरू की थी, जो अब पूर्ण होने के करीब है।

  1. मानकों की जांच: प्रशासन यह जांच रहा है कि आवेदन करने वाले लोग योजना की पात्रता शर्तों (जैसे आय प्रमाण पत्र, भूमिहीनता और पहचान पत्र) को पूरा करते हैं या नहीं।
  2. अंतिम सूची तैयार: प्राप्त सात हजार आवेदनों में से कितने परिवार वास्तव में पात्र हैं और कितने अपात्र, इसकी विस्तृत सूची तैयार की जा रही है। यही सूची 28 अप्रैल को होने वाली सुनवाई का मुख्य आधार बनेगी।

28 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी सबकी निगाहें

बनभूलपुरा क्षेत्र के हजारों निवासियों की किस्मत अब सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर निर्भर है।

  • अदालत का रुख: सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि प्रशासन द्वारा तैयार की गई पुनर्वास योजना पर्याप्त है या नहीं। साथ ही, रेलवे की भूमि को खाली कराने की समयसीमा और पुनर्वास की प्रक्रिया के बीच तालमेल कैसे बिठाया जाएगा, इस पर भी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
  • प्रशासनिक तैयारी: जिला प्रशासन का कहना है कि उन्होंने कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन किया है और प्रभावितों का डेटा पूरी सटीकता के साथ संकलित किया गया है।

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