नदिया/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में असामाजिक तत्वों द्वारा मूर्तियों को खंडित किए जाने का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। जिले के एक कार्यशाला (वर्कशॉप) में रखी गई देवी काली और माता सरस्वती की लगभग 70 अर्द्धनिर्मित मूर्तियों को अज्ञात बदमाशों ने तोड़ दिया। इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव व्याप्त है और सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
घटना का विवरण और स्थानीय आक्रोश
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब मूर्तिकार अपने दैनिक कार्य के बाद कार्यशाला बंद करके घर गए थे। सुबह जब कारीगर वापस लौटे, तो उन्होंने देखा कि तैयार की जा रही दर्जनों मूर्तियां क्षतिग्रस्त पड़ी थीं।
- नुकसान का आकलन: मूर्तिकारों का कहना है कि आगामी सरस्वती पूजा और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए ये मूर्तियां तैयार की जा रही थीं। इस तोड़फोड़ से न केवल उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा है।
- पुलिस की कार्रवाई: सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
भाजपा का तीखा प्रहार: ‘तुष्टीकरण की राजनीति का परिणाम’
इस घटना के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने आरोप लगाया कि बंगाल में हिंदू देवी-देवताओं और त्योहारों पर हमले बढ़ रहे हैं।
- भाजपा का बयान: पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और सरकार एक खास वर्ग को खुश करने के लिए बहुसंख्यक समाज की आस्था के साथ खिलवाड़ होने दे रही है।
- कठोर कार्रवाई की मांग: भाजपा ने मांग की है कि दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित मूर्तिकारों को उचित मुआवजा दिया जाए, अन्यथा पार्टी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेगी।
प्रशासन की अपील
नदिया जिला प्रशासन और पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की एक साजिश हो सकती है, जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। संदिग्धों की तलाश में छापेमारी जारी है।





