पेरिस। फ्रांस में सियासी संकट के बीच राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों की सरकार मुश्किल स्थिति से बाल-बाल बच गई। संसद में प्रधानमंत्री एलीजाबेथ लेकोर्नु के खिलाफ विपक्ष द्वारा पेश किए गए दो अविश्वास प्रस्ताव मंगलवार को खारिज कर दिए गए। इससे सरकार ने अपनी बहुमत स्थिति को कायम रखा और विपक्ष को बड़ी निराशा हाथ लगी।
विपक्षी दलों ने किया हमला
विपक्षी दलों ने सरकार की आर्थिक नीतियों और सामाजिक सुधारों को लेकर गंभीर आपत्तियां उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज किया है और महंगाई व बेरोजगारी के मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया। विपक्षी सांसदों का कहना था कि प्रधानमंत्री लेकोर्नु की नीतियों के कारण देश में राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक अड़चनें पैदा हुई हैं।
अविश्वास प्रस्ताव खारिज, सरकार सुरक्षित
संसद में पेश किए गए दोनों प्रस्तावों में से कोई भी बहुमत हासिल नहीं कर सका, जिससे मैक्रों सरकार ने संकट से बाहर निकलते हुए सुरक्षा का संदेश दिया। संसदीय सूत्रों ने बताया कि सरकार के समर्थक दलों ने मतदान में मजबूती दिखाई और विपक्ष के प्रयासों को विफल कर दिया।
राजनीतिक विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना फ्रांस की राजनीति में मजबूत अलर्ट है। हालांकि सरकार ने संकट टाल लिया, लेकिन यह संकेत भी है कि विपक्ष लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। आगामी महीनों में राष्ट्रपति मैक्रों और उनकी कैबिनेट को आर्थिक सुधार और सामाजिक नीतियों को लेकर और अधिक सावधानी बरतनी होगी।
जनता और मीडिया की नजरें
देश की जनता और मीडिया ने संसद में इस घटना पर गहरी नजर रखी। जनता में मिश्रित प्रतिक्रिया रही—कुछ लोग इसे सरकार की स्थिरता के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि विपक्षी आवाज दबाई जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि मैक्रों सरकार अब अगले चुनावों और आगामी सामाजिक-आर्थिक नीतियों के लिए अपनी रणनीति को और मजबूत करेगी। इस बीच, विपक्ष भी नए तरीके से सियासी हमला करने की तैयारी कर रहा है।
इस तरह, फ्रांस में राजनीतिक संकट फिलहाल टल गया है, लेकिन संसदीय अस्थिरता और विपक्ष की सक्रियता देश की राजनीति में आगामी समय तक तनाव बनाए रख सकती है।
फ्रांस में सियासी संकट: मैक्रों की सरकार बची, PM लेकोर्नु के खिलाफ दो अविश्वास प्रस्ताव खारिज





