देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सैकड़ों लोगों के साथ धोखाधड़ी कर फरार चल रहे ‘इम्पायर इंफ्रास्ट्रक्चर’ के मालिक और बिल्डर शाश्वत गर्ग की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए शाश्वत गर्ग और उनकी पत्नी साक्षी गर्ग पर शिकंजा कस दिया है। जांच एजेंसी ने उनकी अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों को चिन्हित कर उन्हें ‘अटैच’ (कुर्क) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई उन पीड़ितों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर आई है, जिन्होंने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी शाश्वत गर्ग के हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में निवेश की थी। लंबे समय से फरार चल रहे इस दंपति के खिलाफ अब रेड कॉर्नर नोटिस और अन्य सख्त कानूनी कदम भी उठाए जा रहे हैं।
क्या है पूरा घोटाला और ED की जांच का आधार?
शाश्वत गर्ग पर धोखाधड़ी के दर्जनों मामले दर्ज हैं, जिसके आधार पर ED ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है:
- सैकड़ों पीड़ितों से ठगी: आरोप है कि शाश्वत गर्ग ने देहरादून के पॉश इलाकों में आलीशान फ्लैट और विला देने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये वसूले, लेकिन प्रोजेक्ट पूरे नहीं किए।
- शेल कंपनियों का नेटवर्क: जांच में सामने आया है कि ठगी गई रकम को अलग-अलग शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के माध्यम से घुमाया गया और अंततः इसे व्यक्तिगत संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल किया गया।
- पत्नी की भूमिका: ED के अनुसार, शाश्वत की पत्नी साक्षी गर्ग कई कंपनियों में निदेशक थीं और वित्तीय लेनदेन में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।
कुर्क होने वाली संपत्तियों का विवरण
ED ने देहरादून और उसके आसपास के क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण संपत्तियों की सूची तैयार की है:
- जमीन और विला: राजपुर रोड और मसूरी रोड के आसपास स्थित महंगी जमीनें और निर्माणाधीन विला।
- बैंक खाते और निवेश: दंपति के नाम पर मौजूद कई फ्रीज किए गए बैंक खाते और शेयर बाजार में किए गए निवेश।
- लग्जरी वाहन: बिल्डर द्वारा उपयोग किए जाने वाले महंगे वाहनों को भी इस कुर्की की प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
फरार दंपति को पकड़ने के लिए कड़ा रुख
ED और स्थानीय पुलिस की कई टीमें शाश्वत गर्ग की तलाश में जुटी हैं, लेकिन वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है:
- लुकआउट नोटिस: हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर पहले ही अलर्ट जारी किया जा चुका है ताकि वह देश छोड़कर न भाग सके।
- घोषणा: यदि वह जल्द ही जांच एजेंसी के सामने आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो उसे ‘भगोड़ा अपराधी’ घोषित कर उसकी शेष निजी संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
ED की इस कार्रवाई से देहरादून के उन रियल एस्टेट निवेशकों में संतोष का भाव है, जो पिछले कई वर्षों से पुलिस थानों और अदालतों के चक्कर काट रहे थे। संपत्तियों को अटैच करने का मतलब है कि भविष्य में इन संपत्तियों को बेचकर ठगे गए लोगों का पैसा वापस करने की राह आसान हो सकती है। यह मामला राज्य के अन्य बिल्डरों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है जो ग्राहकों के हितों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।





