बदरीनाथ/देहरादून: विश्व प्रसिद्ध भू-बैकुंठ बदरीनाथ धाम में स्थित प्राकृतिक गर्म पानी के कुंड, ‘तप्तकुंड’ के घटते जल स्तर और स्रोत की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार गंभीर हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से प्राप्त विशेष निर्देशों के बाद, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम ने तप्तकुंड के पानी के स्रोत का विस्तृत भू-वैज्ञानिक अध्ययन और सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया है।
क्यों पड़ी अध्ययन की आवश्यकता?
बदरीनाथ मास्टर प्लान के तहत धाम में चल रहे व्यापक पुनर्निर्माण कार्यों के बीच पिछले कुछ समय से तप्तकुंड के जल प्रवाह में बदलाव की खबरें आ रही थीं। स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और भू-वैज्ञानिकों ने चिंता जताई थी कि निर्माण कार्यों या प्राकृतिक भौगोलिक परिवर्तनों के कारण गर्म पानी के मुख्य स्रोत (vains) प्रभावित हो सकते हैं। इस ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के जल स्रोत को संरक्षित करने के लिए ही पीएमओ ने तत्काल तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं।
अध्ययन में शामिल विशेषज्ञ और तकनीक
इस महत्वपूर्ण मिशन में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं:
- वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान और केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) के विशेषज्ञ इस जांच टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।
- GPR (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार): वैज्ञानिक जमीन के भीतर गर्म पानी की धाराओं का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक रडार तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
- आइसोटोप विश्लेषण: पानी के रासायनिक गुणों और उसके तापमान के मूल स्रोत को समझने के लिए जल के नमूनों का प्रयोगशाला में परीक्षण किया जाएगा।
मास्टर प्लान और तप्तकुंड का संरक्षण
बदरीनाथ मास्टर प्लान के तहत मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के विस्तार का काम युद्ध स्तर पर जारी है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:
- भविष्य में होने वाले किसी भी भारी निर्माण से गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोतों को कोई क्षति न पहुँचे।
- तप्तकुंड के जल की निरंतरता और उसके औषधीय गुणों को यथावत बनाए रखा जाए।
- अलकनंदा नदी के कटाव और सुरक्षा दीवारों के निर्माण का स्रोत पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जा सके।
धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
तप्तकुंड का जल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक है, जहाँ भगवान बदरी विशाल के दर्शन से पूर्व स्नान की परंपरा है। भू-वैज्ञानिक दृष्टि से, इतनी ऊंचाई पर और बर्फबारी के बीच निरंतर गर्म पानी का निकलना एक आश्चर्यजनक प्राकृतिक प्रक्रिया है। प्रशासन का कहना है कि इस अध्ययन की रिपोर्ट आने के बाद, तप्तकुंड के संरक्षण के लिए एक दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।





