वॉशिंगटन/नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार व कूटनीतिक रिश्तों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी सीनेटर ने भारत पर आरोप लगाया कि वह “रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से दोस्ती की कीमत चुका रहा है” और इसी वजह से अमेरिका भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने को मजबूर है। इस बयान पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने करारा जवाब देते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति “किसी दबाव या उकसावे” पर नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।
अमेरिकी सीनेटर का बयान
सीनेटर ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत ने मॉस्को से दूरी नहीं बनाई, बल्कि रूस से ऊर्जा और हथियारों का आयात बढ़ाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “पुतिन के साथ दोस्ती भारत को महंगी पड़ रही है, और इसी कारण अमेरिका को भारतीय सामान पर ऊँचे टैरिफ लगाने पड़े हैं।”
जयशंकर का पलटवार
विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बयान पर सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह स्वतंत्र है और देश किसी बाहरी दबाव में झुकने वाला नहीं। जयशंकर ने कहा, “भारत अपनी जनता और अर्थव्यवस्था के हित में फैसले लेता है। हम किसी के कहने पर अपने रिश्ते तय नहीं करेंगे।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते बहुआयामी हैं और किसी एक मुद्दे से प्रभावित नहीं हो सकते। “अगर टैरिफ की समस्या है, तो इसका समाधान आपसी बातचीत से निकलेगा, न कि आरोप-प्रत्यारोप से।”
भारत–रूस संबंधों पर वैश्विक नजर
यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और पश्चिमी देश लगातार रूस पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। लेकिन भारत ने रूस से ऊर्जा आयात जारी रखा है और हथियारों की सप्लाई चेन को बनाए रखा है। यही कारण है कि पश्चिमी देशों के कुछ नेता भारत पर दबाव डालते रहे हैं। हालांकि भारत बार-बार यह स्पष्ट कर चुका है कि रूस के साथ उसके संबंध दशकों पुराने हैं और इन्हें मौजूदा परिस्थितियों में तोड़ना संभव नहीं।
भारत–अमेरिका रिश्तों में खटास?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी सीनेटर की यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच मौजूद सहयोगी माहौल पर छाया डाल सकती है। हालांकि, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग, क्वाड गठबंधन और इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत–अमेरिका की साझेदारी अभी भी मजबूत है।
टैरिफ विवाद का असर
अमेरिका द्वारा भारतीय स्टील, एल्यूमिनियम और कुछ अन्य उत्पादों पर ऊँचे टैरिफ लगाए जाने से दोनों देशों के बीच व्यापार पर असर पड़ा है। भारत लगातार इसे “अनुचित और एकतरफा फैसला” बताता रहा है और बातचीत के जरिए समाधान की कोशिशें जारी हैं।




