Monday, March 9, 2026

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पिथौरागढ़: पर्यावरण बटालियन शिफ्ट करने के फैसले के खिलाफ फूटा आक्रोश; सड़कों पर उतरे पूर्व सैनिकों के परिजन

पिथौरागढ़: पिथौरागढ़ में स्थित पर्यावरण बटालियन को शिफ्ट किए जाने के सरकारी फैसले के विरोध में शनिवार को सीमांत जनपद की सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। पूर्व सैनिकों के साथ-साथ उनके परिवारों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों ने इस निर्णय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अरावली क्षेत्र को बचाने के नाम पर इस बटालियन को यहां से हटाना न केवल पूर्व सैनिकों के हितों की अनदेखी है, बल्कि यह उत्तराखंड के स्थानीय पर्यावरण और रोजगार के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।

कलक्ट्रेट तक निकाली गई आक्रोश रैली

विरोध प्रदर्शन की शुरुआत टकाना क्षेत्र से हुई, जहाँ पूर्व सैनिकों के परिजन बड़ी संख्या में एकत्रित हुए:

  • नारेबाजी और जुलूस: महिलाओं और बच्चों ने नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए कलक्ट्रेट तक एक विशाल रैली निकाली।
  • सरकार के खिलाफ प्रदर्शन: रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासन के माध्यम से अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
  • पूर्व सैनिकों का धरना: रैली के कलक्ट्रेट पहुँचने के बाद, परिजनों ने वहां पहले से ही धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों का साथ दिया और संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया।

स्थानांतरण के विरोध में प्रमुख तर्क

पूर्व सैनिकों के आश्रितों और प्रदर्शनकारियों ने बटालियन को शिफ्ट किए जाने के विरोध में कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे:

  1. पर्यावरण को खतरा: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पर्यावरण बटालियन उत्तराखंड के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसे हटाना प्रदेश के पर्यावरण को खतरे में डालने जैसा है।
  2. पलायन की समस्या: बटालियन के माध्यम से स्थानीय पूर्व सैनिकों को सेवानिवृत्ति के बाद घर के पास ही सम्मानजनक रोजगार मिल रहा था, जिससे क्षेत्र से होने वाले पलायन पर लगाम लग रही थी।
  3. हितों की अनदेखी: प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अरावली क्षेत्र के संरक्षण के लिए इस बटालियन को शिफ्ट करना यहाँ के पूर्व सैनिकों और उनके भविष्य के साथ अन्याय है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस फैसले को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार बटालियन को शिफ्ट करने का आदेश वापस नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। स्थानीय समुदायों और पूर्व सैनिक संगठनों ने भी इस मांग को अपना समर्थन दिया है।

“पर्यावरण बटालियन हमारे जिले और प्रदेश की सुरक्षा का हिस्सा है। इसे शिफ्ट कर हमारे बच्चों के भविष्य और यहाँ की प्रकृति को संकट में डाला जा रहा है।” — विरोध प्रदर्शन में शामिल एक महिला प्रदर्शनकारी

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