नई दिल्ली। भारत और बेल्जियम के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली है। बेल्जियम ने भारत को आश्वासन दिया है कि वह पाकिस्तान को सैन्य उपकरण या संवेदनशील रक्षा तकनीक उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं करेगा। यह आश्वासन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन के बीच हुई बैठक के दौरान मिला।
बैठक में दोनों देशों ने रक्षा और औद्योगिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ संवेदनशील रक्षा तकनीक साझा करना भारत की सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा विषय है। बेल्जियम की ओर से भारत की संवेदनशीलता को ध्यान में रखने की बात कही गई।
रक्षा क्षेत्र में 10 अहम समझौते
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की वार्ता के दौरान भी रक्षा और सुरक्षा सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया गया। दोनों देशों ने सैन्य आदान-प्रदान, प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं विकास, संयुक्त अभ्यास और समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारत और बेल्जियम की रक्षा कंपनियों के बीच करीब 10 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें गोला-बारूद, रॉकेट, ड्रोन रोधी प्रणाली, नौसैनिक माइन काउंटरमेजर सिस्टम और बख्तरबंद वाहनों से जुड़ी तकनीक शामिल है।
भारत में बनेंगे रॉकेट और गोला-बारूद
थेल्स बेल्जियम और कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स भारत में 70 एमएम रॉकेट के निर्माण के लिए सहयोग करेंगे। भारत में पूरी तरह तैयार पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत में बनने की उम्मीद है। इसके अलावा एक अन्य परियोजना के तहत भारत में सालाना करीब 10 करोड़ राउंड गोला-बारूद बनाने की क्षमता वाली उत्पादन सुविधा स्थापित की जाएगी।
समझौतों में समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने वाली स्वायत्त प्रणालियां, काउंटर-ड्रोन तकनीक तथा अर्जुन टैंक के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम भी शामिल हैं। बेल्जियम की कंपनियां भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन और निर्यात क्षमता को बढ़ाने में भी सहयोग करेंगी।
भारत सरकार का जोर विदेशी तकनीक को भारतीय विनिर्माण क्षमता के साथ जोड़कर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षमता मजबूत करने पर है।





