इस्लामाबाद (21 मार्च, 2026): पाकिस्तान के सेना प्रमुख (COAS) जनरल सैयद आसिम मुनीर एक बार फिर एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील विवाद के केंद्र में हैं। शनिवार को, शिया धर्मगुरुओं और विद्वानों के साथ एक इफ्तार बैठक के दौरान, जनरल मुनीर ने आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए शिया समुदाय की पाकिस्तान के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाए। उन्होंने अपमानजनक तरीके से शिया धर्मगुरुओं को “ईरान चले जाने” की सलाह दी, जिससे पाकिस्तान के शिया समुदाय में भारी गुस्सा और आक्रोश व्याप्त हो गया है। कूटनीतिक और धार्मिक हलकों में इस बयान को सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है, विशेषकर ऐसे समय में जब मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध जारी है और पूरा क्षेत्र अशांति की चपेट में है।
विवादित बयान: ‘पाकिस्तान में अफरा-तफरी फैलाने की इजाजत नहीं देंगे’
विश्वसनीय खबरों के मुताबिक, इफ्तार बैठक के दौरान जनरल मुनीर ने शिया विद्वानों को संबोधित करते हुए कहा:
“अगर आपको ईरान से इतना ही प्यार है, तो आप वहीं चले जाओ। हम किसी को भी, किसी दूसरे देश के प्रति अपनी वफादारी की वजह से, पाकिस्तान में अफरा-तफरी फैलाने की इजाजत नहीं देंगे।”
सेना प्रमुख का यह बयान सीधे तौर पर शिया समुदाय को “विदेशी एजेंट” या “ईरान का वफादार” के रूप में चित्रित करता है, जो पाकिस्तान के प्रति उनकी देशभक्ति और निष्ठा को कटघरे में खड़ा करता है। इस बयान से शिया समुदाय को एक बड़ा झटका लगा है, जो पाकिस्तान की आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और देश के निर्माण व विकास में उनकी अहम भूमिका रही है।
अपमानजनक व्यवहार: संवाद की कोई अनुमति नहीं
इफ्तार बैठक में मौजूद शिया नेताओं ने आरोप लगाया कि सेना प्रमुख जनरल मुनीर ने वरिष्ठ विद्वानों और धर्मगुरुओं को अत्यंत अपमानजनक और तानाशाहीपूर्ण तरीके से संबोधित किया:
- एकतरफा संवाद: उन्होंने अपनी बात रखी और शिया नेताओं को अपनी प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण देने का कोई अवसर नहीं दिया।
- अचानक विदा: अपनी विवादित टिप्पणी के तुरंत बाद, जनरल मुनीर बिना किसी संवाद या प्रश्नोत्तर की अनुमति दिए ही बैठक से चले गए। इस व्यवहार को शिया समुदाय ने अपने अपमान और देश के धार्मिक नेतृत्व के प्रति सेना के अलोकतांत्रिक रवैये के रूप में देखा है।
सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका: शिया नेताओं की नाराजगी
जनरल मुनीर के बयान को लेकर पाकिस्तान भर में शिया समुदाय में नाराजगी और गुस्सा बढ़ता जा रहा है। वरिष्ठ धार्मिक नेताओं ने इसके खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है:
- सैयद जवाद नदवी: प्रमुख धार्मिक नेता सैयद जवाद नदवी ने इस बयान को “शिया विरोधी सोच” का प्रमाण बताया है। उन्होंने कहा कि यह बयान सीधे तौर पर एक समुदाय विशेष को निशाना बनाता है और देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला कदम है।
- संगठित विरोध: शिया संगठनों ने सेना प्रमुख के बयान के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को इस बारे में सूचित करने की चेतावनी दी है।
मिडिल ईस्ट संकट और पाकिस्तानी सेना का रुख
जनरल मुनीर की यह तीखी प्रतिक्रिया मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध के परिप्रेक्ष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान, जो पारंपरिक रूप से अमेरिका और सऊदी अरब का एक करीबी सहयोगी रहा है, इस संघर्ष में एक नाजुक स्थिति में है:
- ईरान से संबंध: पाकिस्तान और ईरान के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इनमें सुधार आया था। जनरल मुनीर का बयान इन संबंधों को फिर से तनावपूर्ण बना सकता है।
- शिया समुदाय की चिंता: पाकिस्तान में शिया समुदाय मिडिल ईस्ट संकट को लेकर अत्यंत चिंतित है और ईरान के प्रति उनकी सहानुभूति स्वाभाविक है। जनरल मुनीर की टिप्पणी ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि उन्हें लगता है कि पाकिस्तान की विदेश नीति और आंतरिक सुरक्षा नीतियां अब एक विशेष सांप्रदायिक एजेंडे से प्रभावित हो सकती हैं।





