इस्लामाबाद/जिनेवा। पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठघरे में खड़ा हो गया है। एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान में इस्लामिक स्टेट (IS) जैसे आतंकी संगठनों को समर्थन दे रही है। संगठन ने दावा किया है कि बलूचिस्तान में अलगाववाद और मानवाधिकारों की आवाज को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना आतंकी गुटों का इस्तेमाल कर रही है।
मानवाधिकार संगठन द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान सरकार और सेना की दमनकारी नीतियों का शिकार रहा है। वहां आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और बुद्धिजीवियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि सेना स्थानीय आबादी को डराने और विद्रोही आवाजों को कुचलने के लिए इस्लामिक स्टेट जैसे कट्टरपंथी संगठनों को ‘टूल’ की तरह प्रयोग कर रही है।
संगठन का कहना है कि बलूचिस्तान में लगातार गुमशुदगियों और फर्जी मुठभेड़ों के पीछे भी पाकिस्तानी सेना की मिलीभगत सामने आ रही है। इसके अलावा, यहां हो रहे हमलों में आतंकियों और सेना के बीच सांठगांठ के कई सबूत मिले हैं। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो बलूचिस्तान आतंकवाद का नया अड्डा बन सकता है।
गौरतलब है कि बलूचिस्तान लंबे समय से अस्थिरता का सामना कर रहा है। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध इस क्षेत्र में स्थानीय लोग राजनीतिक अधिकारों और आर्थिक हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। लेकिन, पाकिस्तान सरकार और सेना की सख्त नीतियों के कारण असंतोष और बढ़ता जा रहा है।
मानवाधिकार संगठन ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक शक्तियों से अपील की है कि वे बलूचिस्तान की स्थिति पर हस्तक्षेप करें और पाकिस्तान पर दबाव बनाएं, ताकि वहां मानवाधिकारों का उल्लंघन रोका जा सके और लोगों को न्याय मिल सके।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पाकिस्तान पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर उसकी सेना आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें शह क्यों दे रही है।





