Thursday, March 5, 2026

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पाकिस्तानी पत्रकार नजम सेठी और सत्यपाल मलिक समेत कई नामचीन हस्तियों के खिलाफ असम में FIR

असम की राजधानी गुवाहाटी में पुलिस ने एक संवेदनशील मामले में FIR दर्ज की है, जिसमें नामचीन पत्रकारों और राजनीतिक हस्तियों को आरोपी बनाया गया है। इस एफआईआर में पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन, करन थापर, आशुतोष भारद्वाज, पाकिस्तानी पत्रकार नजम सेठी, जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपराज्यपाल दिवंगत सत्यपाल मलिक और एक अज्ञात व्यक्ति को नामजद किया गया है।
यह एफआईआर गुवाहाटी निवासी बीजू वर्मा की शिकायत पर 9 मई को दर्ज हुई। आरोप है कि पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद ऑनलाइन पोर्टल द वायर पर प्रकाशित लेखों और साक्षात्कारों ने न केवल भारत की संप्रभुता और सुरक्षा को कमजोर किया, बल्कि अव्यवस्था फैलाने और फर्जी सूचना प्रसारित करने का भी काम किया।

पुलिस ने दर्ज किया देशद्रोह का मामला
गुवाहाटी पुलिस ने इस प्रकरण में देशद्रोह की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
• पुलिस ने पिछले सप्ताह पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन और करन थापर को समन जारी किया था और उन्हें क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने का निर्देश दिया था।
• हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों को राहत दी और पुलिस को उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से रोक दिया।
• अदालत ने दो अन्य पत्रकारों को भी पुलिस कार्रवाई से संरक्षण दिया है।
इसी कड़ी में गुवाहाटी पुलिस ने पत्रकार अभिसार शर्मा के खिलाफ भी गुरुवार को एक नया मामला दर्ज किया है।

शिकायतकर्ता के आरोप

शिकायतकर्ता बीजू वर्मा ने आरोप लगाया कि करन थापर ने द वायर पर एक श्रृंखला में ऐसे इंटरव्यू किए, जिनमें नजम सेठी, आशुतोष भारद्वाज और दिवंगत सत्यपाल मलिक शामिल थे। इन चर्चाओं में, खासकर पहलगाम आतंकी हमले के बाद, भारत सरकार के खिलाफ गंभीर और आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गईं।
वर्मा के मुताबिक—
• ये इंटरव्यू सामान्य पत्रकारिता से परे हैं और इन्हें असत्यापित व भड़काऊ बयानबाजी का मंच कहा जा सकता है।
• इनमें सीमा पार आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी भारत पर डालने की कोशिश की गई।
• यहां तक कि पहलगाम हमले में भारतीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत और लापरवाही जैसे आरोप भी लगाए गए।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस प्रकार की सामग्री सीधे तौर पर दुश्मन देशों के दुष्प्रचार को बढ़ावा देती है और भारतीय नागरिकों में अविश्वास और असुरक्षा की भावना पैदा करती है।

‘पत्रकारिता की आड़ में देशद्रोह’

वर्मा ने आगे कहा कि जब ऐसे साक्षात्कार किसी बड़े आतंकी हमले के तुरंत बाद प्रकाशित किए जाते हैं और उन्हें घरेलू व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित किया जाता है, तो यह केवल असहमति नहीं बल्कि पत्रकारिता की आड़ में गलत सूचना और राष्ट्रीय अस्थिरता फैलाने का प्रयास है।
उनका आरोप है कि एक लेख में प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद का अपमान किया गया और यह दिखाने की कोशिश हुई कि सरकार आतंकवाद के सामने कमजोर है। इससे जनता का अपनी ही सरकार पर विश्वास डगमगाने का खतरा पैदा होता है।

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