दक्षिण एशिया इस वर्ष के मानसून सत्र में अब तक की सबसे गंभीर तबाही का सामना कर रहा है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन में लगातार भारी बारिश और बाढ़-भूस्खलन के कारण 2,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा लगभग 1 करोड़ 95 लाख लोग विस्थापित हुए हैं और संपत्ति का अनुमानित नुकसान लगभग 100 अरब डॉलर पहुंच चुका है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने बताया कि यह आंकड़े संबंधित देशों के आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की रिपोर्टों पर आधारित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान मानसूनी सत्र पिछले 50 वर्षों में सबसे विनाशकारी साबित हुआ है। हालांकि, 1970 में बांग्लादेश में आए चक्रवात और 2010 में पाकिस्तान की बाढ़ ने भी लाखों लोगों को प्रभावित किया था, लेकिन इस बार एक ही समय में चार देशों में बड़े पैमाने पर मानवीय संकट गहरा गया है।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
भारत और बांग्लादेश के शहरी क्षेत्र इस बार सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। भारतीय राज्यों में उत्तराखंड, बिहार, असम और हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, तटीय राज्यों—केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र—में अत्यधिक वर्षा से हालात और गंभीर बने हुए हैं।
राहत और बचाव अभियान जारी
सरकारी और गैर-सरकारी संगठन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में जुटे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में अस्थायी शिविर बनाए गए हैं और प्रभावित लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
आगामी मानसून का पूर्वानुमान
मौसम विभागों की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, भारत, पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश में मानसून सक्रिय रहेगा और सितंबर के मध्य तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। अगले दो से तीन हफ्तों में और भीषण वर्षा होने का अनुमान है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भूस्खलन और नदी-तटीय क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रहेगी। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा उपायों का पालन करने की अपील की है।





