कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस (NiV) के मामले सामने आने के बाद राज्य और केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में अब तक निपाह वायरस के केवल दो पुष्ट मामलों की पहचान हुई है। सोशल मीडिया पर फैल रही संक्रमण की खबरों और बढ़ते आंकड़ों को स्वास्थ्य मंत्रालय ने निराधार बताते हुए जनता से भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न देने की अपील की है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और प्रभावित मरीजों को आइसोलेशन में रखकर उनका उपचार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की स्पष्टता: “अफवाहों पर न दें ध्यान”
मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का खंडन किया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि वायरस तेजी से फैल रहा है।
- सटीक आंकड़ा: लैब टेस्ट के बाद केवल दो व्यक्तियों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनके संपर्क में आए अन्य लोगों (Contact Tracing) की पहचान कर ली गई है और वे सभी फिलहाल स्वस्थ हैं।
- भ्रामक सूचनाओं के खिलाफ चेतावनी: मंत्रालय ने कहा है कि बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी भी जानकारी को साझा करना अपराध की श्रेणी में आ सकता है, क्योंकि इससे जनता में अनावश्यक डर पैदा होता है।
क्या है निपाह वायरस और इसके लक्षण?
निपाह एक ज़ूनोटिक वायरस है, जो जानवरों (विशेषकर चमगादड़ और सूअर) से इंसानों में फैलता है। यह दूषित भोजन के जरिए या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से भी फैल सकता है।
प्रमुख लक्षण:
- तेज बुखार और सिरदर्द।
- सांस लेने में तकलीफ (Respiratory distress)।
- मानसिक भ्रम या दौरे पड़ना (Encephalitis)।
- गंभीर स्थिति में मरीज कोमा में भी जा सकता है।
सरकार द्वारा उठाए गए एहतियाती कदम
संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- निगरानी दल: प्रभावित जिलों में विशेष चिकित्सा दलों को भेजा गया है जो संदिग्ध लक्षणों वाले लोगों की निगरानी कर रहे हैं।
- लैब टेस्टिंग: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के सहयोग से नमूनों की जांच की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।
- अस्पतालों में तैयारी: राज्य के प्रमुख अस्पतालों में ‘निपाह आइसोलेशन वार्ड’ तैयार किए गए हैं।
आम जनता के लिए स्वास्थ्य परामर्श (Advisory)
स्वास्थ्य मंत्रालय ने नागरिकों को सुरक्षित रहने के लिए कुछ सरल नियमों का पालन करने की सलाह दी है:
- फलों की सावधानी: जमीन पर गिरे हुए या पक्षियों (चमगादड़) द्वारा कुतरे गए फलों को बिल्कुल न खाएं।
- स्वच्छता: हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोएं।
- पेय पदार्थ: खजूर का कच्चा रस (Raw Date Palm Sap) पीने से बचें, क्योंकि इसमें चमगादड़ की लार होने का खतरा रहता है।
- संपर्क से बचाव: संक्रमित व्यक्ति या जानवर के सीधे संपर्क में आने से बचें और मास्क का प्रयोग करें।
विशेषज्ञों की राय: “सतर्क रहें, डरे नहीं”
चिकित्सकों का कहना है कि निपाह वायरस की मृत्यु दर अधिक होती है, लेकिन यदि समय पर पहचान और आइसोलेशन सुनिश्चित किया जाए, तो इसके प्रसार को रोका जा सकता है। फिलहाल बंगाल में पाए गए दोनों मामले एक ही क्लस्टर से जुड़े हैं, जिसका अर्थ है कि वायरस व्यापक रूप से समुदाय में नहीं फैला है।
“हम स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं। जनता को घबराने की जरूरत नहीं है। केवल स्वास्थ्य मंत्रालय या राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन पर ही विश्वास करें।” — प्रवक्ता, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय





