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पश्चिम एशिया संकट: भारत तेल और गैस संकट से कैसे निपट रहा? संसद में पीएम मोदी ने दिया जवाब, बोले- 27 से बढ़कर 41 हुए आयात के स्रोत; घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली (23 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में जारी भीषण और विनाशकारी संघर्ष के बीच, भारत सरकार ने अपनी सतर्कता और तैयारियों को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया है। इस युद्ध का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, आपूर्ति श्रृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है, जिससे भारत की आर्थिक सुरक्षा और मुद्रास्फीति दर पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (23 मार्च) को लोकसभा में अपनी बात रखी और देश को आश्वस्त किया कि भारत तेल और गैस संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री ने संसद में खुलासा किया कि भारत ने तेल और गैस आयात के अपने स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 41 कर दिया है, जिससे आपूर्ति में विविधता आई है और जोखिम कम हुआ है। यह घोषणा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक कौशल का एक बड़ा और सकारात्मक प्रतीक है, जिससे देश भर में विश्वास और स्थिरता का माहौल व्याप्त हो गया है।

पीएम मोदी का संबोधन: होर्मुज संकट और भारत की चिंता

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन की शुरुआत पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए की:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य: प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस, और फर्टिलाइजर जैसी अहम चीजें होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए आयात करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज में फिलहाल जहाजों का आना-जाना मुश्किल हुआ है, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाओं पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
  • भारत की निर्भरता: प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर बहुत हद तक निर्भर है। उन्होंने कहा कि होर्मुज संकट भारत की आर्थिक सुरक्षा और मुद्रास्फीति दर के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे हल करने के लिए कूटनीतिक और व्यापारिक प्रयासों को तेज किया जाना चाहिए।

आयात के स्रोत: 27 से बढ़कर 41 हुए; विविधता और सुरक्षा

प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति पर एक महत्वपूर्ण खुलासा किया:

“हमारी सरकार ने तेल और गैस आयात के अपने स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 41 कर दिया है। यह एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है और जोखिम कम हुआ है। हमने रूस, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, और अन्य क्षेत्रों के साथ नए तेल और गैस समझौते किए हैं, जिससे आपूर्ति में विविधता आई है। यह हमारी ‘विश्वगुरु’ के रूप में उभरती भूमिका और कूटनीतिक कौशल का एक बड़ा और सकारात्मक प्रतीक है।”

घरेलू उत्पादन: एलपीजी और पेट्रोल-डीजल पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके:

  1. एलपीजी (LPG): प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी जरूरत की लगभग 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसकी सप्लाई में अनिश्चितता के कारण सरकार ने इसके घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी है और इसके देश में उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है।
  2. पेट्रोल-डीजल: प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार और उद्योग के साझा प्रयास से हम पेट्रोल-डीजल और गैस की सप्लाई प्रभावित न हो, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में नए तेल और गैस भंडारों की खोज और विकास को भी तेज किया जा रहा है।

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