यरुशलम/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी विनाशकारी युद्ध आज अपने 31वें दिन में प्रवेश कर गया है। अमेरिका-इजरायल गठबंधन और ईरान के बीच एक महीने से जारी इस भीषण संघर्ष की आग बुझने के बजाय और अधिक भड़कती नजर आ रही है। सोमवार को ईरान और उसके सहयोगी संगठन हिजबुल्ला ने मिलकर इजरायल के प्रमुख तटीय शहर हाइफा पर अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त हमला (‘डबल अटैक’) किया है। इस हमले ने इजरायल के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया है।
हाइफा रिफाइनरी धू-धू कर जली: आसमान में छाया काला धुआँ
ईरान ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि उसकी मिसाइलों ने हाइफा में स्थित इजरायल की सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ऑयल रिफाइनरी को सीधे निशाना बनाया है। सोशल मीडिया पर सामने आए हमले के विचलित करने वाले वीडियो में देखा जा सकता है कि ईरानी मिसाइलें गिरने के तुरंत बाद रिफाइनरी परिसर में भीषण आग लग गई। विस्फोट इतना जोरदार था कि रिफाइनरी के ऊपर से आग की लपटें और काले धुएँ का गुबार कई किलोमीटर दूर तक आसमान में छा गया। यह हमला इजरायल की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
हिजबुल्ला की मिसाइलों की बौछार: नौसैनिक अड्डा बना निशाना
ईरान के हमले के साथ ही, लेबनान स्थित उग्रवादी संगठन हिजबुल्ला ने भी हाइफा में इजरायल के एक महत्वपूर्ण नौसैनिक अड्डे पर मिसाइलों की बौछार कर दी। हिजबुल्ला द्वारा जारी बयान में दावा किया गया है कि उन्होंने नौसैनिक अड्डे के बुनियादी ढांचे और वहां तैनात युद्धपोतों को निशाना बनाकर कई घातक मिसाइलें दागीं। इस हमले के बाद हाइफा शहर में खतरे के सायरन गूंजने लगे और स्थानीय निवासियों में भारी दहशत फैल गई। इजरायली वायु रक्षा प्रणाली ‘आयरन डोम’ ने कुछ मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कई मिसाइलें अपने ठिकानों पर गिरने में सफल रहीं।
युद्ध के 31वें दिन भी थमने का नाम नहीं ले रही तबाही
एक महीना पूरा होने के बावजूद, दोनों पक्षों के बीच जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। इजरायल ने भी गाजा और लेबनान में ईरान समर्थित ठिकानों पर अपने हमले तेज कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार युद्धविराम की अपील कर रहा है, लेकिन अभी तक इसका कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है। इस युद्ध ने अब तक हजारों लोगों की जान ले ली है और लाखों लोगों को विस्थापित कर दिया है। हाइफा पर हुए इस ताज़ा हमले के बाद, क्षेत्र में एक पूर्ण-स्तरीय क्षेत्रीय युद्ध का खतरा और अधिक बढ़ गया है।





