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पश्चिम एशिया महायुद्ध: ईरान का इजरायल की रिफाइनरी पर भीषण हमला; ईरान का दावा- हम संघर्षविराम नहीं चाहते

तेहरान/तेल अवीव: पश्चिम एशिया में जारी खूनी संघर्ष अब अपने ग्यारहवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं। अमेरिका और इजरायल के विनाशकारी हमलों के जवाब में ईरान ने अब इजरायल की ‘ऊर्जा कमर’ तोड़ने के लिए बड़े हमले शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को ईरान ने इजरायल के प्रमुख औद्योगिक शहर हाइफा स्थित तेल और गैस रिफाइनरी को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस बीच, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी तरह के संघर्षविराम (Ceasefire) के पक्ष में नहीं है और इस बार युद्ध का अंत आर-पार की लड़ाई से ही होगा।

इजरायल के ऊर्जा केंद्रों पर बड़ा प्रहार

ईरान की सेना ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस्राइल के खिलाफ अपनी नई सैन्य कार्रवाई की जानकारी साझा की है:

  • हाइफा रिफाइनरी को बनाया निशाना: ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के बाजान ग्रुप (Bazan Group) की रिफाइनरी पर सटीक हमला किया है। यह केंद्र इजरायल का सबसे बड़ा तेल प्रसंस्करण और ईंधन भंडारण डिपो माना जाता है।
  • ईंधन टैंकों में धमाके: रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी ड्रोन और मिसाइलों ने ईंधन टैंकों को निशाना बनाया। ईरान ने इसे इजरायल द्वारा उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) पर किए गए हमलों का ‘करारा जवाब’ बताया है।
  • इजरायल का रुख: हालांकि, इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने अभी तक इस हमले से हुए वास्तविक नुकसान या हताहतों के आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है।

ईरान का कड़ा रुख: ‘अब बातचीत नहीं, केवल मुक्का चलेगा’

वैश्विक शांति प्रयासों के बीच ईरान के संसद अध्यक्ष (स्पीकर) मोहम्मद बाघेर घालिबाफ ने शांति की उम्मीदों को करारा झटका दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी मंशा साफ कर दी:

  1. युद्धविराम से इनकार: घालिबाफ ने दोटूक कहा, “हम निश्चित रूप से सीजफायर की तलाश में नहीं हैं। हमारा मानना है कि आक्रामक (इजरायल) को उसके चेहरे पर मुक्का मारकर ही सबक सिखाना चाहिए।”
  2. इजरायली रणनीति का अंत: उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल ‘युद्ध-बातचीत-युद्ध’ के चक्र का इस्तेमाल कर अपना प्रभुत्व जमाता है, लेकिन ईरान इस बार इस चक्र को हमेशा के लिए तोड़ देगा।
  3. आत्मसम्मान की रक्षा: ईरानी नेतृत्व का मानना है कि अब पीछे हटने का मतलब ईरान के भविष्य को खतरे में डालना है, इसलिए वे निर्णायक युद्ध के लिए तैयार हैं।

दुनिया पर संकट: ट्रंप का रुख और भारत की चिंता

  • ट्रंप की चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का युद्ध को लेकर सख्त और आक्रामक रवैया खाड़ी देशों में आग को और भड़का रहा है, जिससे वैश्विक राजनीति में बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
  • भारत का अलर्ट: भारत सरकार ने कहा है कि पश्चिम एशिया की तेजी से बदलती परिस्थितियों पर उसकी पैनी नजर है। विदेश मंत्रालय ने क्षेत्र में फंसे भारतीयों और ऊर्जा आपूर्ति (LPG/पेट्रोल) को लेकर रणनीतिक तैयारी शुरू कर दी है।

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