देहरादून: उत्तराखंड की सबसे बड़ी चुनौती ‘पलायन’ पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक महायोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में पलायन से सर्वाधिक प्रभावित 474 गांवों के कायाकल्प का रोडमैप पेश किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन गांवों को अब ‘घोस्ट विलेज’ (भूतिया गांव) के ठप्पे से बाहर निकालकर ‘मॉडल विलेज’ के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इन गांवों में बुनियादी सुविधाएं पहुँचाकर न केवल पलायन रोकना है, बल्कि शहरों की ओर जा चुके लोगों की ‘घर वापसी’ का मार्ग भी प्रशस्त करना है।
बैठक के मुख्य बिंदु: सुविधाओं का होगा विस्तार
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन 474 गांवों में प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य किए जाएं:
- बुनियादी ढांचा: जिन गांवों में सड़क, बिजली और पानी की समस्या है, वहां युद्धस्तर पर काम शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक गांव तक सड़क नहीं पहुँचेगी, पलायन रोकना संभव नहीं है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: इन गांवों के पास ‘हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर’ और स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि युवा अपने बच्चों के भविष्य के लिए गांव न छोड़ें।
रोजगार और स्वरोजगार पर फोकस
पलायन रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने आर्थिक आत्मनिर्भरता को सबसे प्रभावी हथियार बताया है:
- होम-स्टे योजना को बढ़ावा: सरकार इन गांवों में खाली पड़े पुराने घरों को ‘होम-स्टे’ के रूप में विकसित करने के लिए ऋण और सब्सिडी प्रदान करेगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को घर पर ही रोजगार मिलेगा।
- कृषि और औद्यानिकी: बंदरों और जंगली जानवरों द्वारा फसलों को पहुँचाए जा रहे नुकसान को रोकने के लिए घेराबंदी (Fencing) की योजना बनाई गई है। साथ ही, इन गांवों में उच्च मूल्य वाली नकदी फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- कौशल विकास: स्थानीय युवाओं को उनकी योग्यता और क्षेत्रीय संसाधनों के आधार पर प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे स्वरोजगार अपना सकें।
पलायन निवारण आयोग की सक्रियता
मुख्यमंत्री ने ‘ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग’ की रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए कहा कि केवल आंकड़ों से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर बदलाव दिखना चाहिए:
- सतत निगरानी: इन 474 गांवों की प्रगति की समीक्षा हर महीने की जाएगी।
- नोडल अधिकारी की नियुक्ति: प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी कि वे इन गांवों की समस्याओं का त्वरित समाधान करें।





