न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में उत्तर कोरिया ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को नहीं छोड़ेगा। देश के स्थायी प्रतिनिधि ने यह बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने दिया और साथ ही अमेरिका पर कड़ा हमला बोला।
उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि ने कहा कि उनकी परमाणु संपत्ति देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की गारंटी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी बाहरी दबाव या धमकी से उनका देश अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेगा। “हमारा देश किसी भी तरह के औद्योगिक या राजनीतिक दबाव में नहीं आएगा। हमारे हथियार हमारी रक्षा और स्वतंत्रता के लिए अनिवार्य हैं,” उन्होंने कहा।
इसके अलावा उत्तर कोरिया ने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका की रणनीति और सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं। प्रतिनिधि ने अमेरिका पर प्रतिकूल नीतियां अपनाने और उत्तर कोरिया को अलग-थलग करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करना चाहिए और उत्तर कोरिया के साथ समान सम्मान और बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया का यह बयान वैश्विक राजनीति में तनाव को और बढ़ा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में इस देश ने कई बार परमाणु और मिसाइल परीक्षण किए हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र में यह भाषण इस बात का संकेत भी है कि उत्तर कोरिया अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सक्रिय है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर कोरिया के इस रुख से पूर्व एशियाई देशों, अमेरिका और रूस को सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती बढ़ जाएगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस क्षेत्र में तनाव को कम करने के लिए सावधानीपूर्वक कूटनीति अपनानी होगी।





