चेन्नई/नई दिल्ली। भारत ने सोमवार को अपने नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसने देश को वैश्विक परमाणु शक्ति के चुनिंदा देशों की अगली कतार में खड़ा कर दिया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित भारत के सबसे उन्नत परमाणु रिएक्टर, प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने सफलतापूर्वक ‘क्रिटिकैलिटी’ (Criticality) का पड़ाव पार कर लिया है। इस सफलता के साथ ही भारत के तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण अब क्रियान्वयन की स्थिति में पहुँच गया है।
क्या है ‘क्रिटिकैलिटी’ और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
परमाणु विज्ञान की भाषा में ‘क्रिटिकैलिटी’ वह अवस्था है, जब रिएक्टर के भीतर परमाणु विखंडन (Fission) की श्रृंखला प्रक्रिया (Chain Reaction) नियंत्रित और निरंतर रूप से चलने लगती है।
- ऊर्जा उत्पादन की शुरुआत: यह इस बात का संकेत है कि रिएक्टर अब बिजली पैदा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
- स्वदेशी तकनीक का लोहा: कलपक्कम का यह रिएक्टर पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में चरितार्थ करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई: “वैज्ञानिक क्षमता का प्रमाण”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मील के पत्थर को भारत की परमाणु यात्रा के लिए एक ‘निर्णायक क्षण’ करार दिया। उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की इस असाधारण सफलता पर गर्व व्यक्त किया।
“आज भारत अपनी नागरिक परमाणु यात्रा में एक निर्णायक कदम उठा रहा है। कलपक्कम में स्वदेशी रूप से निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है। यह उपलब्धि हमारी वैज्ञानिक क्षमता की गहराई और हमारे इंजीनियरिंग उद्यम की ताकत को दर्शाती है।”
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह विकास भारत के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण को मजबूती से आगे बढ़ाएगा, जिससे भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
PFBR की खासियत: ईंधन पैदा करने वाला रिएक्टर
इस रिएक्टर को ‘फास्ट ब्रीडर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह जितना परमाणु ईंधन खर्च करता है, उससे कहीं अधिक ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है।
- थोरियम उपयोग का मार्ग प्रशस्त: यह तकनीक भारत के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। तीसरे चरण में भारत थोरियम आधारित परमाणु ऊर्जा की ओर बढ़ेगा, जो देश को ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बना सकता है।
- सुरक्षित और कुशल: 500 मेगावाट क्षमता वाला यह रिएक्टर सुरक्षा के आधुनिक मानकों से लैस है और कम रेडियोधर्मी कचरा पैदा करता है।
भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा की ओर कदम
कलपक्कम में हासिल की गई यह सफलता भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘क्लीन एनर्जी’ (स्वच्छ ऊर्जा) का एक सतत स्रोत प्रदान करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक में भारत की यह महारत उसे अंतरराष्ट्रीय परमाणु बाजार में भी एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित करेगी।
वैज्ञानिक समुदाय इस उपलब्धि को देश के महान परमाणु भौतिक विज्ञानी डॉ. होमी जहांगीर भाभा के सपने को साकार करने की दिशा में सबसे बड़ी छलांग मान रहा है। अब जल्द ही इस रिएक्टर से ग्रिड को बिजली आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है।





