मंगलवार को कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू के फ्रीडम पार्क में सौ से अधिक चरवाहे इकट्ठा हुए और राज्य सरकार से तत्काल ‘चरवाहा संरक्षण और अत्याचार निवारण विधेयक’ पारित करने की मांग की। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने अपने बजट भाषण में यह वादा किया था कि पारंपरिक चरवाहों के लिए एक सुरक्षात्मक कानून लाया जाएगा। इसी को लेकर चरवाहों ने आज एक स्मरण-पत्र (मेमोरेंडम) सरकार को सौंपने का निर्णय लिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन के लिए सारी व्यवस्था की गई है। पारंपरिक चरवाहा कल्याण संरक्षण संघर्ष समिति ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि चरवाहा समुदाय का लगातार उत्पीड़न, उनके साथ मारपीट, जान से मारने की धमकियां, हत्या, भेड़ों की चोरी और घूसखोरी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। समिति का कहना है कि सबसे अधिक उत्पीड़न उन्हें जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में झेलना पड़ रहा है, जहां अक्सर वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उन्हें परेशान करते हैं।
हाल की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
ज्ञापन में हाल ही में बागलकोट, बीदर और धारवाड़ जिलों में हुई घटनाओं का जिक्र किया गया है, जहां कुछ चरवाहों की हत्या कर दी गई या उन पर हमले हुए। समिति ने लिखा ‘ऐसे मामले मानवता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।’





