नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश उज्ज्वल भुइयां ने न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े फैसलों के कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, क्योंकि देश के नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि न्यायपालिका में नियुक्तियां किस आधार पर की जा रही हैं।
जस्टिस भुइयां ने न्यायिक नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार कॉलेजियम व्यवस्था पर चर्चा करते हुए कहा कि केवल नामों की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि चयन के पीछे के कारणों को भी सामने लाना चाहिए। उनके अनुसार, पारदर्शिता की कमी से योग्य उम्मीदवारों को नुकसान पहुंच सकता है और न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थानों की जवाबदेही जरूरी है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखते हुए जनता के प्रति जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। जस्टिस भुइयां ने इस बात पर चिंता जताई कि नियुक्तियों में निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने से कई सवाल उठते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने यह भी कहा कि न्यायिक पदों पर ऐसे लोगों का चयन होना चाहिए जो संविधान के मूल्यों और न्यायिक जिम्मेदारियों को समझते हों। उन्होंने न्यायपालिका में विविधता और समावेशिता की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
गौरतलब है कि जस्टिस उज्ज्वल भुइयां जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए थे। इससे पहले वह तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं।
न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। कॉलेजियम प्रणाली को लेकर समय-समय पर सुधार और जवाबदेही बढ़ाने की मांग उठती रही है। जस्टिस भुइयां की टिप्पणी ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है कि न्यायपालिका में नियुक्ति प्रक्रिया को किस तरह अधिक खुला और विश्वसनीय बनाया जा सकता है।





