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नेपाल में सुशीला कार्की सरकार का विस्तार, तीन नए मंत्री बने; 5 मार्च तक चुनाव कराने की चुनौती

काठमांडू। नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने सोमवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल द्वारा शुक्रवार देर रात अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपे जाने और रविवार को पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनकी पहली बड़ी राजनीतिक पहल है। सिंह दरबार में आयोजित समारोह में तीन नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई।

तीन नए चेहरे शामिल

  • रामेश्वर खनाल को वित्त मंत्री बनाया गया है। वह पहले आर्थिक सुधार सुझाव आयोग के अध्यक्ष और वरिष्ठ सचिव रह चुके हैं।
  • ओमप्रकाश अर्याल को गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है, साथ ही उन्हें कानून मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। पेशे से वकील अर्याल को संवैधानिक मामलों की गहरी समझ रखने वाला माना जाता है।
  • कुलमान घीसिंग को ऊर्जा मंत्री नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें भौतिक पूर्वाधार, यातायात और शहरी विकास मंत्रालय का भी प्रभार दिया गया है। घीसिंग नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व कार्यकारी निदेशक रहे हैं। ओली सरकार के दौरान उन्हें पद से हटाया गया था। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में उनका नाम प्रधानमंत्री पद की संभावनाओं में भी चर्चा में रहा।

चुनाव तक सीमित कार्यकाल

प्रधानमंत्री कार्की ने अपने पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार केवल 5 मार्च तक नए चुनाव कराने के लिए सत्ता में आई है। उन्होंने कहा, “मैं और मेरी टीम सत्ता का स्वाद चखने के लिए यहां नहीं हैं। हमारा काम देश को स्थिर करना, न्याय की मांगों को पूरा करना और छह महीने के भीतर चुनाव की तैयारी करना है। इसके बाद हम नई संसद को जिम्मेदारी सौंप देंगे।”

जवाबदेही और जांच का वादा

कार्की ने अपने संबोधन में विनम्रता और जवाबदेही का संदेश देते हुए कहा कि हालिया प्रदर्शनों में हुई हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं की जांच की जाएगी। उन्होंने मृतकों के परिजनों को भरोसा दिलाया कि सरकार शवों को उनके गृह जिलों तक पहुंचाने में मदद करेगी। साथ ही, निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी सरकार आगे आएगी।

भारत-नेपाल सीमा पर 79 कैदी गिरफ्तार

इस बीच, नेपाल में हालात सामान्य बनाने की कोशिशों के बीच सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने जानकारी दी कि नेपाल की विभिन्न जेलों से भागे 79 कैदियों को भारत-नेपाल सीमा पार करते समय पकड़ा गया। इनमें दो नाइजीरियाई, एक ब्राजीलियाई और एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं। इनकी उम्र 29 से 40 वर्ष के बीच बताई गई है।

जनता की प्रतिक्रिया

स्थानीय निवासी सूर्य बहादुर श्रेष्ठ ने कहा, “पिछले हफ्ते की तुलना में हालात सुधरे हैं, लेकिन पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। हमें उम्मीद है कि चुनाव समय पर होंगे और हालात स्थिर होंगे।”
वहीं, सबिता सुरखेती ने बताया कि लोग अब भी शोक में हैं और उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी प्रभावित है। “लोगों की आवाजाही कम हो गई है, व्यापार पर असर पड़ा है। हालात पूरी तरह सामान्य होने में समय लगेगा,” उन्होंने कहा।

चुनौतीपूर्ण राह

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कार्की सरकार के लिए आने वाले छह महीने बेहद कठिन होंगे। एक तरफ उन्हें हिंसा और अस्थिरता से जूझते हालात संभालने हैं, वहीं दूसरी ओर पारदर्शी चुनाव की तैयारी करनी है। ऐसे में उनके मंत्रिमंडल के विस्तार को प्रशासनिक स्थिरता और राजनीतिक संतुलन की दिशा में एक शुरुआती कदम माना जा रहा है।

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