काठमांडू। नेपाल में जारी अशांति और हिंसा के बीच अब राजनीतिक माहौल में एक नया मोड़ सामने आया है। एक प्रमुख सामाजिक संगठन ने दावा किया है कि देश में सैन्य मध्यस्थता के बहाने राजशाही को फिर से बहाल करने की साजिश रची जा रही है। संगठन का कहना है कि मौजूदा अस्थिरता और विरोध प्रदर्शनों का फायदा उठाकर कुछ शक्तियाँ लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।
सामाजिक संगठन का आरोप
संगठन ने अपने बयान में कहा कि लगातार बिगड़ते हालात और बढ़ते जनाक्रोश के बीच सेना को ‘मध्यस्थ’ बनाकर राजनीति में हस्तक्षेप की भूमिका दी जा रही है। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि जनसमर्थन जुटाकर राजशाही के पक्ष में माहौल तैयार किया जाए। बयान में कहा गया कि “यह नेपाल की जनता द्वारा लंबे संघर्ष के बाद स्थापित लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
राजशाही बहाली की मांग तेज
गौरतलब है कि हाल के महीनों में नेपाल के विभिन्न हिस्सों में राजशाही समर्थक समूहों ने रैलियाँ और सभाएँ आयोजित की हैं। इन प्रदर्शनों में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह को फिर से सत्ता सौंपने की मांग की जा रही है। वहीं, लगातार हिंसा और बढ़ते असंतोष के बीच इन मांगों को और बल मिल रहा है।
लोकतंत्र की रक्षा की अपील
सामाजिक संगठन ने नेपाल सरकार और राजनीतिक दलों से आह्वान किया कि वे मौजूदा संकट से निपटने के लिए एकजुट होकर आगे आएँ। साथ ही यह भी कहा गया कि जनता को भड़काने और अस्थिरता का माहौल बनाने वाली ताकतों को पहचानकर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय नजर
नेपाल की स्थिति पर पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की पैनी नजर बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि राजशाही की मांग को राजनीतिक संरक्षण मिलता है तो यह नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।





