Wednesday, January 7, 2026

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निकोलस मादुरो और सत्य साईं बाबा: वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति का पुट्टापर्थी से रहस्यमय आध्यात्मिक संबंध

अमेरिकी हिरासत में लिए जाने के बाद वैश्विक सुर्खियों में आए वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर एक पुराना लेकिन चौंकाने वाला पहलू फिर चर्चा में है—भारत के आध्यात्मिक गुरु श्री सत्य साईं बाबा और आंध्र प्रदेश के पुट्टापर्थी से उनका गहरा जुड़ाव।

राजनीतिक सत्ता के शिखर पर पहुंचने से पहले मादुरो ने भारत की यात्रा किसी कूटनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आशीर्वाद के लिए की थी।

 

2005 की पुट्टापर्थी यात्रा: राजनीति से पहले अध्यात्म

साल 2005 में, जब निकोलस मादुरो वेनेजुएला के विदेश मंत्री थे, तब वे अपनी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ भारत आए। इस दौरान दोनों ने आंध्र प्रदेश स्थित प्रशांति निलयम आश्रम में श्री सत्य साईं बाबा से मुलाकात की।

श्री सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट ने बाद में इस यात्रा की पुष्टि की थी। उस समय की कुछ दुर्लभ तस्वीरों में मादुरो पारंपरिक भारतीय शैली में ज़मीन पर बैठे हुए गुरु के प्रवचन सुनते दिखाई देते हैं—एक ऐसा दृश्य, जो उनके बाद के सख्त राजनीतिक व्यक्तित्व से बिल्कुल विपरीत प्रतीत होता है।

 

सिलिया फ्लोरेस की भूमिका: ‘परिवारिक आस्था’

वेनेजुएला में “आयरन लेडी” के नाम से जानी जाने वाली सिलिया फ्लोरेस पहले से ही सत्य साईं बाबा की अनुयायी थीं। माना जाता है कि उन्होंने ही मादुरो को बाबा की शिक्षाओं से परिचित कराया।

राजनीतिक अस्थिरता, तख्तापलट की कोशिशों और सत्ता संघर्ष के दौरान सिलिया अक्सर बाबा के उपदेश—धैर्य, प्रेम और नियति—का हवाला देकर मादुरो को मानसिक संबल देती थीं। यह आस्था धीरे-धीरे एक साझा पारिवारिक विश्वास में बदल गई।

 

राष्ट्रपति भवन में सत्य साईं बाबा की तस्वीर

वेनेजुएला के मिराफ्लोरेस पैलेस में मादुरो के निजी कार्यालय का दृश्य कई आगंतुकों को हैरान करता था। क्रांतिकारी नेता सिमोन बोलिवर और ह्यूगो चावेज़ की तस्वीरों के बीच श्री सत्य साईं बाबा का बड़ा चित्र प्रमुख स्थान पर लगाया गया था।

करीब 13 वर्षों तक मादुरो ने ऐसे आध्यात्मिक गुरु की छवि के साए में निर्णय लिए, जिनका संदेश था—
“Love All, Serve All” (सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो)।

 

2011: लैटिन अमेरिका में अनोखा राष्ट्रीय शोक

अप्रैल 2011 में श्री सत्य साईं बाबा के महाप्रयाण के बाद वेनेजुएला ने एक ऐसा कदम उठाया, जो पूरे लैटिन अमेरिका में अभूतपूर्व था।

तत्कालीन विदेश मंत्री मादुरो के प्रभाव में वेनेजुएला की नेशनल असेंबली ने आधिकारिक शोक प्रस्ताव पारित किया और राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया। इसमें बाबा के “मानवता के लिए आध्यात्मिक योगदान” को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया।

 

नवंबर 2025: शताब्दी वर्ष पर अंतिम श्रद्धांजलि

23 नवंबर 2025, श्री सत्य साईं बाबा की 100वीं जयंती के अवसर पर, मादुरो ने एक सार्वजनिक बयान जारी किया। उन्होंने बाबा को
“प्रकाश का स्वरूप (Being of Light)” बताते हुए कहा—

“मैं हमेशा उन्हें याद करता हूँ। इस महान गुरु की शिक्षाएँ हमें आज भी मार्गदर्शन देती हैं।”

सूत्रों के अनुसार, यह मादुरो का अंतिम प्रमुख गैर-राजनीतिक सार्वजनिक वक्तव्य था, जो उनके शासन के पतन से कुछ समय पहले सामने आया।

 

वेनेजुएला में ‘साईं नेटवर्क’

मादुरो शासन के दौरान, जहां कई विदेशी NGOs को देश से बाहर किया गया, वहीं श्री सत्य साईं सेवा संगठन को स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति मिली।

आज वेनेजुएला में लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े साईं भक्त समुदायों में से एक मौजूद है। काराकस में पहला साईं केंद्र 1974 में स्थापित किया गया था। ये केंद्र स्कूलों और कॉलेजों में मानव मूल्यों के संस्थान भी संचालित करते हैं, जहां
सत्य, धर्म, शांति, प्रेम और अहिंसा की शिक्षा दी जाती है।

 

राजनीति से परे एक वैश्विक आध्यात्मिक प्रभाव

निकोलस मादुरो का राजनीतिक मूल्यांकन चाहे जितना विवादास्पद क्यों न हो, लेकिन सत्य साईं बाबा से उनका जुड़ाव भारत की आध्यात्मिक परंपरा की वैश्विक पहुंच को दर्शाता है।

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