नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताते हुए एक प्रेरणादायक वीडियो संदेश और विस्तृत लेख जारी किया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश की मातृशक्ति की पूरी क्षमता और ऊर्जा को मुख्यधारा से जोड़ना अनिवार्य है। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए सभी राजनीतिक दलों से इसे सामूहिक संकल्प के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया है।
लोकतंत्र को अधिक जीवंत और सहभागी बनाएगा आरक्षण
प्रधानमंत्री ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर साझा किए गए लेख में उल्लेख किया कि 21वीं सदी का भारत एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है।
- समानता और समावेशन: पीएम मोदी के अनुसार, विधायिका में महिलाओं के लिए आरक्षण केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि यह समानता, समावेशन और जनभागीदारी को नए स्तर पर ले जाने का एक सुनहरा अवसर है।
- संसद की जिम्मेदारी: उन्होंने कहा कि संसद के सामने अब यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वह लोकतंत्र को अधिक व्यापक और प्रतिनिधिक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। महिला आरक्षण लागू होने से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को उनका उचित और सम्मानजनक स्थान प्राप्त होगा।
महापुरुषों के मूल्यों और सामाजिक न्याय का स्मरण
अपने संबोधन और लेख में प्रधानमंत्री ने भारत के महान समाज सुधारकों और पारंपरिक उत्सवों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया।
- डॉ. अंबेडकर और ज्योतिराव फुले को नमन: प्रधानमंत्री ने सामाजिक न्याय के पुरोधा महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती और डॉ. भीमराव अंबेडकर की आगामी जयंती का जिक्र करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के प्रयास इन महापुरुषों के समानता के मूल्यों को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।
- सांस्कृतिक एकता का संदेश: उन्होंने देशभर में मनाए जाने वाले रोंगाली बिहू, पणा संक्रांति, पोइला बैशाख, विषु, पुथांडु और बैसाखी जैसे त्योहारों का हवाला देते हुए इसे आशा और सकारात्मकता का समय बताया।
हर क्षेत्र में नारी शक्ति की बढ़ती धमक
प्रधानमंत्री ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि आज की महिला किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है।
- अमूल्य योगदान: विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता (Entrepreneurship), खेल, कला और यहाँ तक कि सशस्त्र बलों में भी महिलाएं अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।
- शासन की गुणवत्ता में सुधार: पीएम मोदी का मानना है कि नीति-निर्माण और शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से चर्चाएँ अधिक समृद्ध और संवेदनशील होती हैं, जिससे लोकतंत्र अधिक संतुलित और जवाबदेह बनता है।
ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और भविष्य का रोडमैप
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि दशकों से महिला आरक्षण के प्रयास लंबित थे, जिन्हें वर्तमान सरकार ने निर्णायक मोड़ पर पहुँचाया है।
- कानूनी अमलीजामा: सितंबर 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को उन्होंने एक क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि अब इसे पूरी तरह लागू करने का समय आ गया है ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनावों में महिलाएं इस आरक्षण का लाभ उठा सकें।
- सामूहिक संकल्प की अपील: लेख के अंत में उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से राजनीति से ऊपर उठकर इस पहल का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा, “यह किसी एक दल का विषय नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के गौरव और भविष्य का विषय है।”





