वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (NATO), ईरान और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर दिए एक हालिया इंटरव्यू में कई अहम संकेत दिए हैं। उनके बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान की गतिविधियों के कारण अमेरिका और नाटो देशों को अपनी सुरक्षा रणनीति मजबूत करनी होगी। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है और इसकी सुरक्षा वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने हाल ही में ईरान से जुड़े सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति की सुरक्षा से जोड़ा है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि यह कदम उन गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया जो वैश्विक शिपिंग को प्रभावित कर सकती थीं।
ट्रंप प्रशासन का तर्क रहा है कि ईरान की सैन्य क्षमता और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम भविष्य में अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए खतरा बन सकते हैं। वहीं आलोचकों का कहना है कि युद्ध के कारणों और रणनीति को लेकर अमेरिकी नेतृत्व के भीतर भी मतभेद दिखाई दिए हैं।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि नाटो की भूमिका केवल यूरोप तक सीमित नहीं रह सकती और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों में गठबंधन की सक्रिय भागीदारी जरूरी होगी। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस बात को लेकर चिंता बढ़ी है कि ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने से तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।





