देहरादून: उत्तराखंड में नए साल का स्वागत बेहद उत्साह और ‘जोश’ के साथ किया गया। आंकड़ों की मानें तो इस बार जश्न का रंग कुछ ज्यादा ही गहरा रहा। दिसंबर के आखिरी सप्ताह और नए साल की पूर्व संध्या पर प्रदेश में शराब की रिकॉर्ड तोड़ बिक्री दर्ज की गई है। एक अनुमान के मुताबिक, इस दौरान राज्य में लगभग 225 करोड़ रुपये की शराब और बीयर की खपत हुई, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
पर्यटन स्थलों पर जमकर छलके जाम
नए साल का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और कॉर्बेट नेशनल पार्क पहुंचे थे। इन पर्यटन केंद्रों पर शराब की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ गई।
- होटल और रेस्टोरेंट में भारी मांग: हिल स्टेशनों के होटलों, पबों और रेस्टोरेंट्स में देर रात तक चली पार्टियों में शराब की खपत सबसे अधिक रही।
- प्रीमियम ब्रांड्स की धूम: इस बार देशी शराब के मुकाबले अंग्रेजी शराब और प्रीमियम विदेशी ब्रांड्स की मांग में जबरदस्त उछाल देखा गया।
राजस्व में हुई भारी बढ़ोतरी
शराब की इस बंपर बिक्री से उत्तराखंड के आबकारी विभाग का खजाना भी भर गया है।
- सालाना लक्ष्य की ओर कदम: दिसंबर के आखिरी 10 दिनों में हुई यह रिकॉर्ड बिक्री राज्य सरकार के राजस्व लक्ष्यों को प्राप्त करने में बड़ी मददगार साबित होगी।
- आबकारी विभाग के आंकड़े: विभाग के अनुसार, नए साल के आसपास औसतन प्रतिदिन की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में 30% से 50% तक बढ़ गई थी।
प्रशासन की सख्ती और सुरक्षा
भारी खपत के बीच पुलिस और प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।
- ड्रिंक एंड ड्राइव पर लगाम: शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने जगह-जगह ‘ब्रेथ एनालाइजर’ के साथ चेकिंग अभियान चलाया।
- ओवररेटिंग पर नजर: आबकारी विभाग की टीमों ने शराब की दुकानों पर ओवररेटिंग (तय कीमत से अधिक दाम वसूलना) रोकने के लिए भी छापेमारी की।
सामाजिक चर्चा का विषय
एक ओर जहां सरकारी खजाने के लिए यह अच्छी खबर है, वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी मात्रा में शराब की खपत ने सामाजिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चिंता भी पैदा की है। जानकारों का कहना है कि उत्सवों के नाम पर बढ़ती नशे की प्रवृत्ति एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है।





