देहरादून: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने जन शिकायतों के निस्तारण में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड कायम किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में चलाए गए विभिन्न अभियानों और ‘1905’ हेल्पलाइन व समाधान पोर्टल के माध्यम से सरकार लगभग 2.80 लाख लोगों की समस्याओं तक पहुंचने में सफल रही है। मुख्यमंत्री धामी के ‘सरलीकरण, समाधान और निस्तारण’ के मंत्र पर चलते हुए शासन ने 95 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का सफलतापूर्वक निपटारा कर दिया है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें न केवल शहरी, बल्कि राज्य के सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों की शिकायतों को भी प्राथमिकता के आधार पर सुना गया है।
कैसे बना शिकायतों के निस्तारण का नया रिकॉर्ड?
सरकार की इस सफलता के पीछे तकनीक और बेहतर निगरानी का एक सुव्यवस्थित तंत्र है:
- समाधान पोर्टल और 1905 हेल्पलाइन: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1905 को अधिक सक्रिय किया गया है, जहाँ लोग घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं। इन शिकायतों की सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से निगरानी की जा रही है।
- समय सीमा (Deadline) का पालन: अधिकारियों को प्रत्येक शिकायत के समाधान के लिए एक निश्चित समय सीमा दी गई है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देशों ने इस प्रक्रिया को तेज किया है।
- सरकार जनता के द्वार: मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और सचिवों को जिलों के प्रभारी के रूप में मौके पर जाकर जनता की समस्याएं सुनने और मौके पर ही निस्तारण करने के निर्देश दिए थे।
प्रमुख क्षेत्रों में मिली बड़ी राहत
इन 2.80 लाख शिकायतों में सबसे अधिक मामले बुनियादी सुविधाओं से जुड़े थे, जिनका त्वरित समाधान किया गया:
- राजस्व और भूमि विवाद: सालों से लंबित भूमि संबंधी विवादों और प्रमाण पत्रों से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण तहसील स्तर पर शिविर लगाकर किया गया।
- सड़क और पेयजल: पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क की मरम्मत और पेयजल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता दी गई।
- स्वास्थ्य और शिक्षा: अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता और स्कूलों के बुनियादी ढांचे को लेकर मिली शिकायतों पर तत्काल कदम उठाए गए।
मुख्यमंत्री धामी का दृष्टिकोण: “अंतिम छोर तक पहुंचे लाभ”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को न्याय मिले। उन्होंने कहा कि “शिकायत का केवल क्लोजर रिपोर्ट लगाना समाधान नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता की संतुष्टि ही असली निस्तारण है।” सरकार अब एक फीडबैक सिस्टम भी लागू कर रही है, जिसमें शिकायतकर्ता से कॉल करके पूछा जाता है कि क्या वह समाधान से संतुष्ट है या नहीं।
निष्कर्ष: सुशासन की नई मिसाल
शिकायतों के निस्तारण में बनाए गए इस नए रिकॉर्ड ने उत्तराखंड में प्रशासन के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत किया है। जानकारों का मानना है कि यदि इसी गति से जनसमस्याओं का समाधान होता रहा, तो उत्तराखंड ‘आदर्श राज्य’ बनने की राह पर तेजी से अग्रसर होगा। फिलहाल, सरकार अब आगामी ‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम के अगले चरण की तैयारी कर रही है ताकि शेष लंबित मामलों को भी जल्द सुलझाया जा सके।




