देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एक ऐसा समावेशी बजट पेश किया है, जिसका मुख्य केंद्र ‘अवस्थापना विकास’ (Infrastructure Development) है। सरकार ने इस बजट के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि विकास की लहर केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सुदूर पर्वतीय गांवों तक भी समान रूप से पहुँचेगी। बजट में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान किए गए हैं, जो ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के संकल्प को नई गति देंगे।
अवस्थापना विकास: सुगम होगा सफर और बेहतर होगी कनेक्टिविटी
बजट में राज्य के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए भारी निवेश का प्रस्ताव है:
- गांवों का मुख्यधारा से जुड़ाव: ‘मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना’ के तहत सैकड़ों नए ग्रामीण मार्गों को मंजूरी दी गई है, ताकि किसानों के उत्पाद आसानी से मंडियों तक पहुँच सकें।
- शहरी कायाकल्प: देहरादून, हल्द्वानी और ऋषिकेश जैसे शहरों में ट्रैफिक की समस्या सुलझाने के लिए फ्लाईओवरों, रिंग रोड और स्मार्ट पार्किंग सुविधाओं के लिए विशेष बजट आवंटित किया गया है।
- चारधाम ऑल वेदर रोड का विस्तार: तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए चारधाम यात्रा मार्ग से जुड़ी फीडर सड़कों के सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया गया है।
हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल: समावेशी बजट की झलक
सरकार ने केवल बड़े प्रोजेक्ट्स ही नहीं, बल्कि आम जनजीवन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं पर भी फोकस किया है:
- पेयजल सुरक्षा: ‘जल जीवन मिशन’ के दूसरे चरण के लिए बजट बढ़ाकर यह सुनिश्चित किया गया है कि हर घर तक स्वच्छ पानी की आपूर्ति हो।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: पर्वतीय क्षेत्रों में नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) के निर्माण और मौजूदा स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूल’ में बदलने के लिए फंड जारी किया गया है।
- पर्यटन को बढ़ावा: होमस्टे योजना और नए पर्यटन स्थलों के विकास के लिए बजटीय सहायता दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होगा।
पहाड़ के पानी और जवानी को रोकने की कवायद
बजट का एक बड़ा हिस्सा ‘रिवर्स माइग्रेशन’ यानी पलायन रोकने की रणनीतियों पर केंद्रित है:
- स्वरोजगार योजनाएं: स्थानीय युवाओं को अपने गांवों में ही छोटे उद्योग और स्टार्टअप शुरू करने के लिए कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
- कृषि बुनियादी ढांचा: दुर्गम क्षेत्रों में कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना के लिए बजट दिया गया है, ताकि फल और सब्जियों की बर्बादी रोकी जा सके।





