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धामी सरकार का ऐतिहासिक कदम: वन भूमि पर बसे परिवारों को मिलेगा भूमिधरी अधिकार; नई नीति पर काम शुरू

देहरादून: उत्तराखंड में दशकों से वन भूमि पर बसे हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार अब इन परिवारों को उनकी जमीन का मालिकाना हक यानी ‘भूमिधरी अधिकार’ देने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार एक ऐसी नई और व्यापक नीति पर काम कर रही है, जिसके तहत कानूनी बाधाओं को दूर कर पात्र निवासियों को उनके निवास स्थान का कानूनी अधिकार सौंपा जा सके। इस कदम से न केवल इन परिवारों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ भी मिल सकेगा।

क्यों जरूरी है यह कदम? (समस्या और समाधान)

राज्य के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जो पीढ़ियों से वन भूमि या ‘वर्ग-4’ की भूमि पर बसे हुए हैं, लेकिन कागजों में मालिकाना हक न होने के कारण वे कई सुविधाओं से वंचित हैं:

  • सरकारी योजनाओं का अभाव: भूमिधरी अधिकार न होने के कारण इन परिवारों को बैंक लोन, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य निर्माण संबंधी लाभ लेने में कठिनाई होती है।
  • बेदखली का डर: मालिकाना हक न होने से इन बस्तियों पर हमेशा अतिक्रमण विरोधी अभियानों की तलवार लटकी रहती है।
  • बुनियादी सुविधाएं: कई क्षेत्रों में सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं पहुंचाने में भी तकनीकी अड़चनें आती हैं क्योंकि जमीन का स्टेटस ‘वन भूमि’ होता है।

नई नीति की रूपरेखा: कैसे मिलेगा हक?

सरकार इस जटिल समस्या के समाधान के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रही है:

  1. चिन्हीकरण और सर्वे: राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीमें ऐसी बस्तियों का विस्तृत सर्वे करेंगी जो 1980 के वन संरक्षण अधिनियम से पहले की हैं या जो विशिष्ट श्रेणियों के अंतर्गत आती हैं।
  2. कानूनी पेचीदगियों का समाधान: सरकार केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर रही है ताकि ‘फॉरेस्ट क्लीयरेंस’ और ‘लैंड म्यूटेशन’ की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सके।
  3. पात्रता के मानक: मालिकाना हक देने के लिए एक ‘कट-ऑफ डेट’ (निश्चित तिथि) तय की जा सकती है, ताकि केवल पुराने और वास्तविक हकदारों को ही इसका लाभ मिले और नए अतिक्रमण को बढ़ावा न मिले।

विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे हजारों परिवार

मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नीति बनाते समय यह ध्यान रखा जाए कि पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) भी बना रहे और गरीब परिवारों के हितों की रक्षा भी हो:

  • पक्के मकानों का सपना: भूमिधरी अधिकार मिलते ही ये परिवार अपने कच्चे मकानों को पक्का बनाने के लिए सरकारी सहायता के पात्र हो जाएंगे।
  • स्थायी निवास का प्रमाण: यह कदम इन क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को शिक्षा और रोजगार के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करने में भी मदद करेगा।

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