धर्मशाला/नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में एक मेधावी छात्रा द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। इस हृदयविदारक घटना पर संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने कड़ा रुख अपनाया है। यूजीसी ने न केवल इस मामले में कॉलेज प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है, बल्कि एक विशेष ‘फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी’ (तथ्य अन्वेषण समिति) का भी गठन कर दिया है जो मौके पर जाकर विस्तृत जांच करेगी।
दोषियों पर गिरेगी गाज यूजीसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों का मानसिक उत्पीड़न या किसी भी प्रकार की प्रताड़ना असहनीय है। आयोग ने आश्वासन दिया है कि यदि जांच में रैगिंग, भेदभाव या शिक्षकों द्वारा मानसिक उत्पीड़न की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा और संस्थान की मान्यता पर भी विचार किया जा सकता है।
समिति करेगी हर पहलू की जांच नवनियुक्त फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी धर्मशाला पहुंचकर छात्रा के परिवार, सहपाठियों और कॉलेज स्टाफ के बयान दर्ज करेगी। समिति इस बात की भी जांच करेगी कि क्या छात्रा ने पहले कोई शिकायत की थी और यदि हाँ, तो कॉलेज प्रशासन ने उस पर क्या कार्रवाई की। यूजीसी यह सुनिश्चित करना चाहता है कि संस्थान के भीतर ‘छात्र शिकायत निवारण तंत्र’ (Student Grievance Redressal Cell) प्रभावी रूप से काम कर रहा था या नहीं।
देशभर के विश्वविद्यालयों के लिए अलर्ट इस घटना के बाद यूजीसी ने देशभर के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को एक कड़ा परामर्श (Advisory) जारी किया है। इसमें कहा गया है कि कैंपस में छात्रों की काउंसलिंग के लिए पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए और किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी सीधे तौर पर संस्थान के प्रमुख की होगी। आयोग ने दोहराया कि शिक्षा के मंदिरों को भयमुक्त वातावरण प्रदान करना अनिवार्य है।
“हम इस मामले की तह तक जाएंगे। यह केवल एक सुसाइड केस नहीं है, बल्कि हमारे सिस्टम की खामियों को उजागर करने वाली घटना है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” — अधिकारी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC)





