देहरादून। मानसून सीजन को देखते हुए उत्तराखंड का सिंचाई विभाग इस बार बाढ़ प्रबंधन को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गया है। विभाग ने राज्य की 13 प्रमुख नदियों और 12 बैराजों पर सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। इसका उद्देश्य बारिश के दौरान संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटना है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस विस्तृत योजना के तहत नदियों के जलस्तर की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। साथ ही बैराजों के संचालन पर भी लगातार नजर रखी जाएगी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर पानी का नियंत्रित डिस्चार्ज कर किसी बड़े खतरे को टाला जा सके।
योजना में आपदा प्रबंधन तंत्र को भी मजबूत किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, नदी किनारे बसे इलाकों में चेतावनी प्रणाली को और प्रभावी बनाने की तैयारी है, जिससे लोगों को समय रहते अलर्ट किया जा सके।
सिंचाई विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह योजना पूरी तरह “फूलप्रूफ” बाढ़ प्रबंधन के उद्देश्य से बनाई गई है। इसमें जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पिछले वर्षों में मानसून के दौरान सामने आई चुनौतियों से सीख लेते हुए इस बार तकनीकी संसाधनों और निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया गया है। नदियों के प्रवाह और बैराजों की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी।
प्रशासन का मानना है कि इस योजना से न केवल बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा, बल्कि आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देकर जन-धन की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
इस तरह सिंचाई विभाग की यह पहल राज्य में मानसून के दौरान बाढ़ प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।





