देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। डॉक्टरों का कहना है कि मामूली सर्दी-जुकाम या बुखार होने पर बिना डॉक्टरी परामर्श के मेडिकल स्टोर से खरीदकर एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) का सेवन करना भविष्य के लिए घातक साबित हो रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह लापरवाही एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को जन्म दे रही है, जिससे साधारण संक्रमणों पर भी दवाएं बेअसर होती जा रही हैं।
क्या है एएमआर (AMR) और यह क्यों है खतरनाक? एएमआर एक ऐसी स्थिति है जब शरीर में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट्स दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं:
- दवाओं का बेअसर होना: जब कोई व्यक्ति बार-बार या गलत तरीके से एंटीबायोटिक्स लेता है, तो संक्रमण फैलाने वाले कीटाणु खुद को बदल लेते हैं, जिससे भविष्य में वही दवाएं काम करना बंद कर देती हैं।
- साधारण बीमारियां बनीं जानलेवा: विशेषज्ञों के अनुसार, निमोनिया और टीबी जैसी बीमारियों का इलाज अब रेजिस्टेंस के कारण कठिन होता जा रहा है।
- अस्पतालों में लंबा प्रवास: दवाएं काम न करने के कारण मरीजों को लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है और इलाज का खर्च भी कई गुना बढ़ जाता है।
देहरादून में ‘सेल्फ मेडिकेशन’ का बढ़ता चलन शहर के स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए एक अनौपचारिक सर्वे और फीडबैक में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- सीधे दवा खरीदना: बड़ी संख्या में लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय सीधे फार्मासिस्ट से एंटीबायोटिक मांगते हैं, जो कानूनी और चिकित्सकीय रूप से गलत है।
- अधूरा कोर्स: कई मरीज एक-दो खुराक लेने के बाद आराम मिलने पर दवा बीच में ही छोड़ देते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि यह स्थिति बैक्टीरिया को और अधिक शक्तिशाली बनाती है।
- वायरल में एंटीबायोटिक: विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया पर काम करती हैं, वायरल बुखार (जैसे सामान्य फ्लू) पर नहीं, फिर भी लोग इनका अनावश्यक सेवन कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों की सलाह स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता के लिए विशेष दिशानिर्देश और सलाह जारी की है:
- डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य: केवल पंजीकृत डॉक्टर (Registered Medical Practitioner) द्वारा लिखी गई एंटीबायोटिक ही लें।
- कोर्स पूरा करें: यदि डॉक्टर ने 5 दिन की दवा लिखी है, तो लक्षण ठीक होने के बावजूद कोर्स पूरा करें।
- फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी: मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना वैध पर्ची के ‘शेड्यूल-H’ श्रेणी की दवाएं न बेचें।





