देहरादून: राजधानी देहरादून में साइबर ठगों ने एक डॉक्टर को अपना शिकार बनाते हुए उनसे लाखों रुपये की ठगी की है। ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ की नई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए चिकित्सक को उनके ही घर में कैद होने पर मजबूर कर दिया और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनके बैंक खाते से 2.34 लाख रुपये उड़ा लिए। जब डॉक्टर को ठगी का अहसास हुआ, तब तक काफी देर हो चुकी थी। पीड़ित चिकित्सक ने तुरंत देहरादून साइबर सेल और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद एसटीएफ (STF) ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
कैसे बुना गया ‘डिजिटल अरेस्ट’ का जाल?
साइबर ठगों ने बेहद शातिर तरीके से इस पूरी वारदात को अंजाम दिया:
- फर्जी कॉल से शुरुआत: डॉक्टर के पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आई, जिसमें फोन करने वाले ने खुद को कोरियर कंपनी का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि डॉक्टर के नाम से भेजे गए एक पार्सल में प्रतिबंधित नशीली दवाएं और फर्जी पासपोर्ट मिले हैं।
- पुलिस और सीबीआई का डर: कॉल को तुरंत एक ‘फर्जी पुलिस अधिकारी’ को ट्रांसफर किया गया, जिसने वीडियो कॉल के जरिए डॉक्टर को डराया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स तस्करी का गंभीर मामला दर्ज हुआ है।
- वीडियो कॉल पर निगरानी: ठगों ने डॉक्टर को स्काइप (Skype) वीडियो कॉल पर रहने का निर्देश दिया और कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, वे कॉल काट नहीं सकते और न ही किसी को इसके बारे में बता सकते हैं। इसे ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है।
डरा-धमकाकर कराई गई ट्रांजेक्शन
करीब 4 घंटे तक डिजिटल हिरासत में रखने के बाद ठगों ने डॉक्टर से पैसों की मांग शुरू की:
- वेरिफिकेशन का झांसा: ठगों ने कहा कि यदि वे अपनी बेगुनाही साबित करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने बैंक खाते की जांच करानी होगी। इसके लिए उन्हें ‘सरकारी सुरक्षा खाते’ में पैसे ट्रांसफर करने होंगे।
- लाखों की चपत: डरे हुए चिकित्सक ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में कुल 2.34 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
- संपर्क तोड़ना: जैसे ही पैसे ठगों के पास पहुंचे, उन्होंने वीडियो कॉल काट दी और अपना नंबर बंद कर लिया।
साइबर सेल की कार्रवाई और चेतावनी
शिकायत मिलने के बाद देहरादून पुलिस की साइबर यूनिट सक्रिय हो गई है:
- बैंक खातों को फ्रीज करना: पुलिस ने उन संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे।
- जागरूकता अपील: पुलिस ने जनता से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। ऐसी कॉल आने पर तुरंत 1930 नंबर पर सूचना दें।
निष्कर्ष: सतर्कता ही बचाव है
यह घटना बताती है कि साइबर अपराधी अब मनोवैज्ञानिक दबाव का उपयोग कर रहे हैं। पढ़े-लिखे लोगों का इस तरह झांसे में आना चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी या बैंक विवरण साझा न करें और यदि कोई ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दे, तो तुरंत फोन काटकर स्थानीय पुलिस को सूचित करें।





