देहरादून: राजधानी देहरादून के सरकारी स्कूलों में जर्जर हो चुके भवनों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देश के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने जिले के ऐसे 76 स्कूल भवनों की सूची तैयार की है, जो पूरी तरह असुरक्षित घोषित किए जा चुके हैं। इन भवनों को अब प्राथमिकता के आधार पर ध्वस्त (Demolish) किया जाएगा। लंबे समय से इन जर्जर कमरों में बच्चों को बिठाना उनकी जान के साथ खिलवाड़ माना जा रहा था, लेकिन अब ‘सिस्टम’ की नींद टूट गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि नौनिहालों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और ध्वस्तीकरण के तुरंत बाद नए और आधुनिक भवनों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
क्यों जरूरी हुई यह कार्रवाई?
देहरादून जिले के कई प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के भवन दशकों पुराने हैं और उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी थी:
- हादसे का डर: बारिश के मौसम में इन भवनों की छतों से पानी टपकने और दीवारों में बड़ी दरारें आने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। कई स्कूलों में छत का प्लास्टर गिरना आम बात हो गई थी।
- असुरक्षित घोषित: पीडब्ल्यूडी (PWD) की तकनीकी जांच में इन 76 भवनों को ‘अनफिट’ पाया गया था, जिसके बाद इन्हें खाली करा लिया गया था, लेकिन ये ढांचे अभी भी परिसर में खड़े थे जो बच्चों के लिए खतरा बने हुए थे।
- सीएम का कड़ा निर्देश: मुख्यमंत्री ने हालिया समीक्षा बैठक में विभाग को फटकार लगाते हुए पूछा था कि जब भवन असुरक्षित हैं, तो उन्हें अभी तक ढहाया क्यों नहीं गया।
शिक्षा विभाग की तैयारी और बजट
मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) देहरादून ने ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को लेकर खाका तैयार कर लिया है:
- ध्वस्तीकरण की समय-सीमा: अगले कुछ हफ्तों के भीतर सभी चिन्हित भवनों को गिराने का काम शुरू कर दिया जाएगा ताकि आगामी सत्र से पहले मलबा हटाकर नई योजना पर काम हो सके।
- वैकल्पिक व्यवस्था: जिन स्कूलों के भवन गिराए जा रहे हैं, वहां के छात्रों के लिए पास के अन्य सुरक्षित कमरों या रेंटल भवनों में बैठने की अस्थाई व्यवस्था की गई है ताकि शिक्षा बाधित न हो।
- नए भवनों का निर्माण: शिक्षा विभाग ने इन 76 भवनों के पुनर्निर्माण के लिए बजट का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। ‘पीएम श्री’ योजना और राज्य निधि से इन स्कूलों का कायाकल्प किया जाएगा।
अभिभावकों और शिक्षकों ने जताई राहत
प्रशासन के इस कदम का अभिभावकों ने स्वागत किया है। कई अभिभावकों का कहना था कि वे हर रोज अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय डरे रहते थे। शिक्षकों का भी मानना है कि जर्जर भवनों के ढहने से परिसर में खुला स्थान मिलेगा और नए कमरों के निर्माण से बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।
निष्कर्ष: सुरक्षा और शिक्षा का संगम
मुख्यमंत्री धामी का यह आदेश केवल देहरादून ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक संदेश है कि सरकारी स्कूलों का ढांचा मजबूत और सुरक्षित होना चाहिए। जर्जर भवनों को हटाना ‘विकसित उत्तराखंड’ की दिशा में एक अनिवार्य कदम है। अब देखना यह होगा कि ध्वस्तीकरण के बाद नई इमारतों का निर्माण कितनी तेजी से पूरा किया जाता है।




