देहरादून: राजधानी देहरादून में सरकारी जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त और अतिक्रमण के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग ने शेखुल हिंद एजुकेशन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट समेत 193 संदिग्ध खरीदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जांच में सामने आया है कि इन लोगों और संस्थाओं ने सरकारी, नजूल और सीलिंग की जमीनों को धोखाधड़ी से अपने नाम दर्ज कराया या उन पर अवैध निर्माण किया है। इस कार्रवाई से जिले के भू-माफियाओं और अवैध कॉलोनाइजरों में हड़कंप मच गया है।
जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
प्रशासन द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) और राजस्व विभाग की संयुक्त रिपोर्ट में कई गंभीर वित्तीय और कानूनी अनियमितताएं पाई गई हैं:
- अभिलेखों में हेराफेरी: जांच में पाया गया कि कई दशकों पुराने सरकारी भू-अभिलेखों (खतौनी) के साथ छेड़छाड़ कर सरकारी भूमि को निजी घोषित कर दिया गया।
- ट्रस्ट की भूमिका: ‘शेखुल हिंद ट्रस्ट’ पर आरोप है कि उसने नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि पर कब्जा किया और उस पर निर्माण कार्य शुरू कराया। प्रशासन ने ट्रस्ट से भूमि के मालिकाना हक से जुड़े मूल दस्तावेज तलब किए हैं।
- बेनामी सौदे: 193 खरीदारों की सूची में कई ऐसे नाम भी शामिल हैं जिन्होंने सीलिंग की भूमि को सस्ते दामों पर खरीदकर वहां अवैध प्लॉटिंग की है।
प्रशासन की चेतावनी: ध्वस्तीकरण और FIR की तैयारी
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने पर प्रशासन कठोर कदम उठाएगा:
- अवैध निर्माण का ध्वस्तीकरण: यदि खरीदार भूमि के वैध दस्तावेज पेश नहीं कर पाते हैं, तो उन जमीनों पर किए गए निर्माण को ‘बुलडोजर’ की मदद से ढहा दिया जाएगा।
- जमीन की जब्ती: ऐसी सभी विवादित भूमियों को तत्काल प्रभाव से ‘शून्य’ घोषित कर राज्य सरकार के खाते में वापस दर्ज (निहित) किया जाएगा।
- क्रिमिनल केस: भू-माफियाओं और अवैध रूप से जमीन बेचने और खरीदने वालों के खिलाफ जालसाजी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
आम जनता के लिए एडवाइजरी
प्रशासन ने इस कार्रवाई के माध्यम से जनता को भी जागरूक रहने की सलाह दी है:
- सत्यापन जरूरी: जमीन खरीदने से पहले तहसील कार्यालय से ’12 साला’ रिकॉर्ड और जमीन की वर्तमान स्थिति (Status) की जांच अवश्य करें।
- नजूल और सीलिंग से बचें: देहरादून के कई इलाकों में नजूल और सीलिंग की जमीनें हैं, जिनकी रजिस्ट्री कानूनी रूप से मान्य नहीं है।





