Sunday, November 30, 2025

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देहरादून में बादल फटने से तबाही: मजाडा गांव में लोगों ने ऐसे बचाई जान

देहरादून। सहस्रधारा से लगभग पांच किलोमीटर ऊपर बसे मजाडा गांव में आधी रात बादल फटने से मची तबाही ने लोगों को दहला दिया। रात के सन्नाटे में जब अचानक घर हिलने लगे और बाहर चीख-पुकार गूंजने लगी, तो लोगों को अपनी जान बचाने की जद्दोजहद करनी पड़ी।

गांव के निवासी दीपू और जामा ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि यह रात उनकी जिंदगी की सबसे खौफनाक रात थी। चेहरे पर तबाही का डर और कई किलोमीटर पैदल चलने की थकान के बीच उन्होंने बताया कि किस तरह घर छोड़कर भागना पड़ा। जामा ने रोते हुए कहा—”सब कुछ बरबाद हो गया। अगर हम 15 मिनट और घर में रुक जाते तो जिंदा न बचते।”

पहली बार रात करीब एक बजे बादल फटा। लोग चीखते-चिल्लाते घरों से बाहर निकले। कुछ देर बाद जब माहौल शांत हुआ तो ग्रामीणों को लगा कि खतरा टल गया है। लेकिन तड़के करीब चार बजे फिर से जमीन कांपी, घर हिले और भय का मंजर लौट आया। तब गांववालों ने सीटियां बजाकर और टॉर्च जलाकर एक-दूसरे को सुरक्षित स्थान पर इकट्ठा करना शुरू किया।

जामा ने बताया कि सुबह करीब साढ़े चार बजे वह अपने परिवार के पांच सदस्यों के साथ घर से बाहर निकल गए। “हमारे निकलने के महज 15 मिनट बाद ही पूरा घर पानी में बह गया।” उन्होंने बताया कि इस आपदा ने दशकों पुरानी बस्ती को तहस-नहस कर दिया है।

मजाडा से सुरक्षित स्थान पर पहुंचे लोगों ने बताया कि गांव में कई पड़ोसी अब भी मलबे में दबे हो सकते हैं। दशकों से साथ रहने वाले लोग इस आपदा में एक-दूसरे को बचाने के लिए भी खड़े नहीं हो पाए। सब अपनी-अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में इधर-उधर भाग गए।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कड़ी मेहनत और परिश्रम से अपने घर बनाए थे, लेकिन एक ही रात की बारिश और आपदा ने सब कुछ उजाड़ दिया। गांव का दृश्य किसी खंडहर से कम नहीं बचा है।

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