देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की सड़कें आज उस समय राजनीतिक अखाड़ा बन गईं जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और हाल के दिनों में हुई जघन्य हत्याओं के विरोध में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘हल्ला बोल’ कार्यक्रम के तहत भारी संख्या में सड़कों पर उतरकर धामी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ‘देवभूमि’ अब ‘अपराध भूमि’ में तब्दील हो रही है और सरकार सोई हुई है। राजभवन कूच के दौरान पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स पर कांग्रेसियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।
सरकार पर तीखे बाण: ‘खौफ में है आम जनता’
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं ने रैली को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार की विफलता गिनाई:
- अपराध के बढ़ते आंकड़े: कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में चोरी, डकैती और सरेराह हत्या की घटनाएं आम हो गई हैं। अपराधी बेखौफ हैं और पुलिस केवल चालान काटने तक सीमित रह गई है।
- महिला सुरक्षा पर सवाल: हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राज्य में महिलाएं और बेटियां अब सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं।
- वीआईपी संस्कृति का आरोप: कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के दबाव के कारण पुलिस अपराधियों पर निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय राजनीतिक हितों को साधने में जुटी है।
सड़कों पर संग्राम: भारी पुलिस बल तैनात
कांग्रेस के कूच को रोकने के लिए प्रशासन ने राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे:
- बैरिकेडिंग और वाटर कैनन: प्रदर्शनकारियों को राजभवन से काफी पहले रोकने के लिए पुलिस ने कई लेयर की बैरिकेडिंग की थी। जब कांग्रेस कार्यकर्ता बैरिकेड्स लांघने की कोशिश करने लगे, तो पुलिस के साथ उनकी भारी झड़प हुई।
- नेताओं की गिरफ्तारी: प्रदर्शन के दौरान कई बड़े नेताओं को पुलिस ने एहतियातन हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया, जिन्हें बाद में रिहा किया गया।
- जाम से लोग परेशान: प्रदर्शन के कारण राजपुर रोड और आसपास के मुख्य मार्गों पर घंटों लंबा जाम लगा रहा, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस की मुख्य मांगें
पार्टी ने राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपा, जिसमें निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:
- निष्पक्ष जांच: हालिया समय में हुई प्रमुख हत्याओं की जांच हाईकोर्ट के मौजूदा जज की निगरानी में कराई जाए।
- पुलिसिंग में सुधार: थाना स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त किया जाए।
- फास्ट ट्रैक कोर्ट: महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन कर अपराधियों को तत्काल सजा दिलाई जाए।





